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इस बार भी नहीं होगी मानसरोवर यात्रा, शिव भक्तों को नहीं होंगे भोले बाबा के दर्शन

कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर रद्द हो गयी है। लेकिन यात्रा रद्द क्यो हुई? इसका कोई ठोस कारण अभी तक पता नही लग पाया है क्योकि ये मामला विदेश मंत्रालय से जुड़ा हुआ है। मानसरोवर यात्रा के रद्द होने से उत्तराखंड को भारी आर्थिक नुकसान होगा। क्योंकि उत्तराखंड से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत मानी जाती है। यहीं से होकर यात्रा चीन-तिब्बत बोर्डर तक जाती है।

केएमवीएन को 4 से 5 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने की उम्मीद

विश्व प्रसिद्ध मानसरोवर यात्रा के रद्द होने की खबर से जहाँ एक ओर शिव भक्त भगवान से नहीं मिल पाएंगे, वहीं दूसरी ओर देवभूमि उत्तराखंड में भी कैलाश मानसरोवर यात्रा का दीदार पिछले दो वर्षों की भांति इस वर्ष भी नही कर पाएंगे। जिसे लेकर उत्तराखंड के लोगों में काफी मायूसी है। आपको बता दें कि पिछले 2 साल कोरोना के चलते मानसरोवर यात्रा नहीं हो पायी थी। जिसके चलते लोगों को आस थी कि इस बार मानसरोवर यात्रा जरूर होगी। लेकिन इस फैसले के बाद मीडिया रिपोर्ट के हिसाब से जहाँ एक ओर केएमवीएन को 4 से 5 करोड़ के राजस्व के नुकसान होने की उम्मीद है वहीं दूसरी तरफ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले पड़ावों के छोटे कारोबारी भी मायूस हैं।

यात्रा नहीं ,रोजगार का अवसर हुआ रद्द

उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रा में जाते हुए सबसे पहले काठगोदाम, भीमताल ,अल्मोड़ा और पिथौरागढ़-गूंजी- नाभि डांग उसके बाद अंत में चीन तिब्बत बॉर्डर तक जाते हैं। यात्रा का प्रथम पड़ाव हल्द्वानी काठगोदाम से होकर गुजरता है काठगोदाम से पिथौरागढ़ और फिर गुंजी तक की यात्रा के दौरान बीच में कई छोटे-छोटे पड़ाव भी पड़ते हैं । जिसमे काम करने वाले छोटे कारोबारी, व्यापारी और स्थानीय लोगों के लिए ये यात्रा मात्र यात्रा नहीं बल्कि रोजगार का एक सुनहरा अवसर भी है। जो इन्हें आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर मजबूती प्रदान करता है। मगर यात्रा के रद्द होने की खबर से ये लोग काफी मायूस हैं। क्योकि ये यात्रा रद्द नहीं हुई बल्कि इनके रोजगार का अवसर रद्द हुआ है।

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