नई दिल्ली: ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान का फोकस ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार से होने वाली कमाई को रोकना है।
इस कार्रवाई में भारत की चार कंपनियों और तीन नागरिकों पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों और लोगों ने ईरान से पेट्रोलियम एवं पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ये भारतीय कंपनियां आईं अमेरिकी निशाने पर
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक प्रतिबंधों की सूची में पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी, सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
इसके अलावा पोर्टईज पार्टनर्स से जुड़े हरीश रामचंद्र रंगी और इद्रिसमिया अशरफमिया शेख तथा पीपी सॉफ्टेक से जुड़े प्रशांत गर्ग पर भी कार्रवाई की गई है।
करोड़ों डॉलर के ईरानी तेल कारोबार का आरोप
अमेरिका के अनुसार पोर्टईज पार्टनर्स ने कस्टम ब्रोकर के तौर पर ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों को भारत पहुंचाने में मदद की। वहीं सदाशिव ओवरसीज पर करीब 6.9 करोड़ डॉलर के पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने का आरोप है।
पीपी सॉफ्टेक और प्रकृतिज इंफ्रा पर भी लगभग 2.5-2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी तेल उत्पादों से जुड़े लेन-देन का आरोप लगाया गया है।
60 से ज्यादा लोगों-कंपनियों पर कार्रवाई
अमेरिका ने इस अभियान के तहत दुनिया भर में करीब 60 व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। वॉशिंगटन का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल आय के स्रोतों को कमजोर करने और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए की गई है।
मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र के कुछ स्थानों से पहले हटाए गए राजनयिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान को लेकर अमेरिकी रणनीति आर्थिक दबाव के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी सक्रिय हो रही है।

