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राम मंदिर के बाद सिद्धिविनायक पर भी घमासान, राज ठाकरे ने लगाया ₹18 करोड़ दान चोरी का आरोप

photo - ANI

 

 

 

 

नई दिल्ली : मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दान राशि के कथित गबन का आरोप लगाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर पहले से चल रहे विवाद का भी उल्लेख किया।

सिद्धिविनायक मंदिर पर क्या बोले राज ठाकरे?

राज ठाकरे ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर में दान पेटी से हर साल करोड़ों रुपये की कथित चोरी होती रही। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की सतर्कता से कथित अनियमितताओं का पता चला, जिसके बाद दान संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। उनके अनुसार, इससे पहले बड़ी मात्रा में दान राशि का नुकसान हो रहा था।

मंदिर ट्रस्ट ने दिया जवाब

राज ठाकरे के आरोपों पर सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने कहा कि अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। ट्रस्ट के मुताबिक, मामले में 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार कराया गया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। ट्रस्ट ने यह भी दावा किया कि निगरानी व्यवस्था मजबूत होने के बाद मंदिर की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

राम मंदिर विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक गर्मी

सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर उठे सवाल ऐसे समय सामने आए हैं, जब संसद के मानसून सत्र में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। विपक्ष ने इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों जगह उठाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है।

प्रदर्शन के बाद कानूनी कार्रवाई

संसद परिसर के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन को लेकर कई नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत और एफआईआर दर्ज की गई है। भाजपा नेताओं और कुछ धार्मिक संगठनों ने प्रदर्शन को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन बता रहा है।

जांच और पारदर्शिता पर उठे सवाल

सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़े आरोपों और राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, विभिन्न मामलों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

 
 
 
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