इस्तीफे के बाद संसद में ‘पावर शो’! क्या बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान को दे दिया बड़ा राजनीतिक संदेश?

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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के दो दिन बाद धर्मेंद्र प्रधान जब पहली बार संसद पहुंचे, तो नजारा किसी सामान्य सांसद के स्वागत का नहीं, बल्कि ताकत के सार्वजनिक प्रदर्शन जैसा दिखा। संसद परिसर में भाजपा और एनडीए सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे सियासी गलियारों में नए कयास शुरू हो गए हैं।

धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन किया। इस दौरान कई सांसद उनके समर्थन में जुट गए। कुछ सांसदों ने उन्हें पारंपरिक शॉल और ओडिशा की सांस्कृतिक टोपी पहनाकर सम्मानित किया। पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व का भरोसा अब भी उनके साथ कायम है।

‘मैं मैदान का कार्यकर्ता हूं, बंद कमरों का नेता नहीं’

मीडिया से बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन एक लाइन में बड़ा संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा जमीनी संघर्ष की राजनीति करने वाले व्यक्ति रहे हैं और आगे भी उसी भावना के साथ काम करते रहेंगे।

विपक्ष ने साधा निशाना, प्रधान ने नहीं खोया संयम

कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर तंज भी कसा गया, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय संयमित रुख अपनाया। उन्होंने किसी राजनीतिक विवाद में पड़ने से बचते हुए अपने भविष्य पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।

अब अगली जिम्मेदारी क्या होगी?

राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में अब यह सवाल है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान को भाजपा संगठन में बड़ी भूमिका मिलने वाली है। पार्टी के भीतर उन्हें अनुभवी रणनीतिकार माना जाता है और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उन्हें चुनाव प्रबंधन या संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें तेज हैं।

सियासी संदेश क्या है?

संसद में जिस तरह का स्वागत देखने को मिला, उसने यह संकेत जरूर दिया कि इस्तीफा उनके राजनीतिक कद में कमी का संकेत नहीं माना जा रहा। अब सभी की नजर भाजपा के अगले फैसले पर है कि धर्मेंद्र प्रधान की नई भूमिका क्या होगी और पार्टी उन्हें किस जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाती है।

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