Site icon The Mountain People

CBSE को CIC का सख्त निर्देश: बोर्ड परीक्षाओं के खर्च और उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद प्रक्रिया का देना होगा ब्योरा

 

 

 

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को बड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित खर्च और उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद प्रक्रिया से जुड़ी सूचनाओं को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराया जाए। आयोग ने सीबीएसई द्वारा पूर्व में दी गई अधूरी जानकारी और सूचना देने से किए गए इनकार को पर्याप्त नहीं माना है।

मामला 2023-24 और 2024-25 सत्र में आयोजित कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में इस्तेमाल हुई उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद और उस पर हुए खर्च से जुड़ा है। एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं के कागज की गुणवत्ता, पृष्ठों की संख्या, आकार, खरीद लागत, कुल खर्च, जीएसटी भुगतान और निविदा प्रक्रिया से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

सीबीएसई ने जवाब में केवल यह बताया था कि उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 60 से 120 जीएसएम गुणवत्ता वाले कागज का उपयोग किया गया। पुस्तिकाओं में 8, 20, 32, 40 और 48 पृष्ठ शामिल थे तथा उनका आकार 22×28 सेंटीमीटर और 37.5×54.5 सेंटीमीटर था। हालांकि, बोर्ड ने खरीद लागत, कुल खर्च, खरीदी गई पुस्तिकाओं की संख्या और निविदा प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देने से इनकार कर दिया था।

सीबीएसई का तर्क था कि निविदा प्रक्रिया, उसमें भाग लेने वाली कंपनियों के नाम, कोट की गई दरें और चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी गोपनीय एवं संवेदनशील प्रकृति की है। इसी आधार पर खर्च संबंधी जानकारियां भी साझा नहीं की गईं।

मामले की सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने पाया कि सीबीएसई ने सूचना रोकने के लिए आरटीआई अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला तो दिया, लेकिन उसके समर्थन में कोई ठोस और उचित कारण प्रस्तुत नहीं किया। आयोग ने यह भी नोट किया कि सुनवाई के दौरान केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) उपस्थित नहीं हुए और न ही अपने निर्णय के समर्थन में कोई लिखित स्पष्टीकरण दिया।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जिन सूचनाओं का पूर्ण खुलासा संभव नहीं है, उन्हें आरटीआई अधिनियम की धारा-10 के तहत आवश्यक अंश हटाकर या छिपाकर उपलब्ध कराया जा सकता है। लेकिन सूचना देने से इनकार करने के लिए धारा-8(1)(डी) का उपयोग करते समय स्पष्ट और उचित कारण बताना अनिवार्य है।

सीआईसी ने सीबीएसई को निर्देश दिया है कि वह मांगी गई जानकारी की दोबारा समीक्षा कर बिंदुवार जवाब दे और कानून के अनुरूप उपलब्ध कराई जा सकने वाली सूचनाओं को सार्वजनिक करे। आयोग के इस फैसले को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Exit mobile version