‘जनकल्याण शिविर’ से जनता तक पहुंचेगी सरकार, तीन दिन में घर-घर योजनाओं का लाभ पहुंचाने की तैयारी

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कोलकाता: सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल में 15 से 17 जून तक राज्यव्यापी ‘जनकल्याण शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। इस विशेष अभियान के माध्यम से आम लोगों को विभिन्न सरकारी सेवाएं, योजनाओं का लाभ, दस्तावेज सत्यापन और शिकायतों के समाधान की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार की योजना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक सात ग्राम पंचायतों के लिए एक शिविर स्थापित किया जाएगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक दस वार्डों पर एक शिविर लगाया जाएगा। वहीं कोलकाता नगर निगम सहित सभी नगर निगम क्षेत्रों में प्रत्येक बोरो कार्यालय को जनकल्याण शिविर का केंद्र बनाया जाएगा।

तीन दिवसीय इस अभियान के दौरान पात्र नागरिकों का मौके पर ही पंजीकरण किया जाएगा। साथ ही आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन, विभिन्न जनहित योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं और वास्तविक लाभार्थियों के बीच की दूरी कम होगी तथा लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

अभियान की निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक विशेष आईटी पोर्टल विकसित किया गया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिविरों में होने वाली गतिविधियों, लाभार्थियों की संख्या, सेवा वितरण और शिकायत निवारण से जुड़ी सभी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। योजना, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग को इस पूरे अभियान की नोडल एजेंसी बनाया गया है।

कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए राज्य से लेकर जिला, ब्लॉक और नगर निकाय स्तर तक विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल इसकी निगरानी करेंगे, जबकि जिलों में जिलाधिकारी, ब्लॉक स्तर पर बीडीओ, अनुमंडल स्तर पर एसडीओ और नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे।

सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ कार्य किया जाए। प्रशासन का मानना है कि यह पहल सरकारी सेवाओं को आम लोगों के और करीब लाने के साथ-साथ जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के शिविर मॉडल से न केवल योजनाओं की पहुंच बढ़ती है, बल्कि पात्र लाभार्थियों की पहचान और सेवा वितरण प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनती है। ऐसे में यह अभियान राज्य के लाखों लोगों के लिए सरकारी सुविधाओं तक आसान पहुंच का माध्यम बन सकता है।

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