देहरादून: बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और हाल के साइबर खतरों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकारी नेटवर्क, सर्वर और संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखने के लिए अब प्रदेश में आधुनिक साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित किया जाएगा।
राज्य डेटा सुरक्षा को लेकर आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों और अधिकारियों ने साइबर खतरों से निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान निर्णय लिया गया कि सरकारी डिजिटल प्रणालियों में अब ‘जीरो ट्रस्ट मॉडल’ लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था में किसी भी उपयोगकर्ता, डिवाइस या एप्लीकेशन को स्वतः विश्वसनीय नहीं माना जाएगा, बल्कि हर स्तर पर उसकी पहचान और गतिविधियों का लगातार सत्यापन किया जाएगा।
साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य स्तर पर एक अत्याधुनिक सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र चौबीसों घंटे सरकारी वेबसाइटों, सर्वरों और नेटवर्क की निगरानी करेगा। किसी भी संदिग्ध गतिविधि, असामान्य ट्रैफिक या साइबर हमले के संकेत मिलने पर तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
नई नीति के तहत संवेदनशील सरकारी डेटा को सुरक्षित राज्य डेटा सेंटर या सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म पर संरक्षित किया जाएगा। इससे महत्वपूर्ण सूचनाओं पर सरकार का सीधा नियंत्रण बना रहेगा और बाहरी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी।
साथ ही विभिन्न विभागों में उपयोग हो रहे राउटर, नेटवर्क स्विच, सीसीटीवी कैमरे, स्मार्ट सिटी सेंसर और अन्य डिजिटल उपकरणों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी डिवाइस में ऐसा तकनीकी रास्ता या बैकडोर मौजूद न हो, जिसका दुरुपयोग बाहरी एजेंसियां कर सकें।
सरकार बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली को भी लागू करेगी, जिसके तहत केवल पासवर्ड आधारित लॉगिन के बजाय ओटीपी, सिक्योरिटी टोकन और अन्य प्रमाणीकरण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे अनधिकृत पहुंच की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी।
विशेषज्ञों ने कार्यशाला में कहा कि आधुनिक दौर में साइबर हमलों का असर केवल कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बिजली, जलापूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, ट्रैफिक प्रबंधन, स्मार्ट सिटी नेटवर्क और सरकारी डेटा केंद्रों जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि साइबर सुरक्षा अब केवल सूचना प्रौद्योगिकी का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह राज्य की आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन रणनीति का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।
उत्तराखंड सरकार की यह पहल भविष्य की डिजिटल चुनौतियों से निपटने और सरकारी सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

