TMP: हरिद्वार महाकुंभ 2027 को प्लास्टिक फ्री बनाने के लिए सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। योजना के तहत करीब 15 करोड़ मिट्टी के कुल्हड़ तैयार किए जाएंगे, ताकि कुंभ में प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह खत्म किया जा सके। इसके लिए हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर के 350 से अधिक कुम्हारों को आधुनिक चाक मशीनें उपलब्ध कराने की तैयारी है।
एमएसएमई विभाग की ओर से कुम्हारों को 75 फीसदी तक सब्सिडी पर मशीनें दी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे पारंपरिक कुम्हारी कला को बढ़ावा मिलेगा और हजारों परिवारों को रोजगार भी मिलेगा। लेकिन जमीनी स्तर पर कुम्हारों की चिंता कुछ और ही है।
कुम्हारों का कहना है कि मशीनों से उत्पादन तो बढ़ जाएगा, लेकिन कुल्हड़ बनाने के लिए जरूरी चिकनी मिट्टी की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। उत्तराखंड में पर्याप्त मात्रा में उपयुक्त मिट्टी नहीं मिल पा रही है, जबकि बाहर से मिट्टी मंगाने में खनन अनुमति और परिवहन संबंधी प्रक्रियाएं मुश्किल पैदा कर रही हैं।
कई कारीगरों का कहना है कि अगर मिट्टी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो करोड़ों कुल्हड़ बनाने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। कुछ परिवार तो इस पुश्तैनी काम को छोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुंभ को सफलतापूर्वक प्लास्टिक फ्री बनाने के लिए सरकार को मशीनों के साथ-साथ मिट्टी की उपलब्धता, खनन नियमों में राहत और आसान परिवहन व्यवस्था पर भी काम करना होगा। तभी यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर सफल हो पाएगी।

