हरिद्वार: वैशाख मास की शुरुआत के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। स्नान-दान और पूजन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है, जबकि प्रशासन भी आगामी बड़े पर्वों को लेकर सतर्क हो गया है।
विशेष रूप से 14 अप्रैल को मेष संक्रांति, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया और 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी के अवसर पर हर की पैड़ी समेत प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
25 व्रत-त्योहारों से सजा वैशाख
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वैशाख मास में कुल 25 प्रमुख व्रत-त्योहार पड़ रहे हैं, जिनमें मेष संक्रांति, अक्षय तृतीया, गंगा सप्तमी और शीतलाष्टमी विशेष महत्व रखते हैं। मान्यता है कि इस महीने किए गए स्नान, दान और पूजन का अक्षय फल प्राप्त होता है।
चारधाम यात्रा से जुड़ी आस्था
चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी परंपरा के अनुसार गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं और यहां से ही अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं। भीमगौड़ा कुंड और कनखल समेत अन्य घाटों पर भी श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे।
शास्त्रों में वैशाख का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य डा. चंडी प्रसाद भट्ट के अनुसार स्कंद पुराण में वैशाख मास का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में गंगा स्नान और भगवान विष्णु की पूजा से मोक्ष और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
विवाह और शुभ कार्यों की शुरुआत
उत्तराखंड में वैशाखी के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त भी शुरू हो जाते हैं। अक्षय तृतीया से हिमालय की चारधाम यात्रा का भी शुभारंभ होता है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।
प्रमुख व्रत-त्योहार (वैशाख 2026)
- 09 अप्रैल – शीतला सप्तमी
- 10 अप्रैल – कालाष्टमी व शीतलाष्टमी
- 13 अप्रैल – वरुथिनी एकादशी
- 14 अप्रैल – मेष संक्रांति (सतुआ संक्रांति)
- 15 अप्रैल – प्रदोष व मास शिवरात्रि
- 17 अप्रैल – अमावस्या (स्नान-दान)
- 19 अप्रैल – अक्षय तृतीया व परशुराम जयंती
- 21 अप्रैल – आदि शंकराचार्य जयंती, गणेश चतुर्थी
- 23 अप्रैल – गंगा सप्तमी
- 27 अप्रैल – मोहिनी एकादशी
- 30 अप्रैल – नृसिंह जयंती
- 01 मई – वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा)
वैशाख मास में हरिद्वार एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनने जा रहा है, जहां गंगा किनारे लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ के लिए जुटेंगे।