देहरादून: मुख्यमंत्री ने रविवार को बालावाला, देहरादून में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में शिरकत की। उन्होंने सम्मेलन को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदू समाज की चेतना, एकता और आत्मगौरव का महापर्व बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हिंदू समाज जागृत, संगठित और अपने धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के प्राचीन वैभव को पुनर्स्थापित करने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में ऐसे विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, जो सामाजिक चेतना को नई दिशा दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन से जुड़ना उनके लिए गर्व का विषय है। संघ ने अपने 100 वर्षों के सफर में देश के सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित किया और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाया। शिक्षा, कृषि, ग्राम विकास, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान, सेवा, कला और विज्ञान—ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ योगदान न दिया हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भाषाओं, परंपराओं और जीवनशैलियों की विविधता से भरा देश है, लेकिन इन विविधताओं के बीच संघ ने सदैव भारत की एकात्मता को सशक्त किया है। एक भारत–श्रेष्ठ भारत की भावना को जनमानस में मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि पूजा-पद्धतियाँ अलग हो सकती हैं, पर मूल मानवीय मूल्य एक हैं। इसी विचारधारा का व्यापक स्वरूप हिंदुत्व है, जो विविधताओं को शक्ति और संस्कृति को पहचान मानता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून, ऑपरेशन कालनेमी के तहत सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना, मदरसा बोर्ड को समाप्त कर समान शिक्षा व्यवस्था लागू करना और हिंदू स्टडी सेंटर की स्थापना जैसे निर्णय इसी दिशा में किए गए हैं।