उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को आई भयावह प्राकृतिक आपदा के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। अब तक करीब 200 लोग गांव में फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना रेस्क्यू टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी संकट के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को खुद ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
धराली तक पहुंचना रेस्क्यू टीमों के लिए बना “मिशन इम्पॉसिबल”
आपदा के कारण धराली गांव तक सड़क मार्ग पूरी तरह से नष्ट हो गया है, और खीरगंगा से आए मलबे ने इलाके को दलदल में बदल दिया है। बारिश और बाढ़ के पानी से जमा कीचड़ इतनी खतरनाक स्थिति में है कि ज़रा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।
सेना, ITBP, NDRF, SDRF, उत्तरकाशी पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी ताकत से राहत व बचाव कार्यों में जुटे हैं, लेकिन लगातार बारिश, खराब मौसम और फिसलन भरा भूभाग उनका रास्ता रोक रहा है।
पीएम मोदी खुद ले रहे अपडेट, केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा
धराली आपदा को लेकर दिल्ली से लेकर देहरादून तक हड़कंप मचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस आपदा पर नजर रखे हुए हैं और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से लगातार फोन पर अपडेट ले रहे हैं।
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मंगलवार को पीएम ने सीएम धामी से बात कर धराली में हुए नुकसान और रेस्क्यू की स्थिति पर जानकारी ली थी।
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बुधवार सुबह एक बार फिर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को कॉल कर पूरे घटनाक्रम का ताजा फीडबैक लिया और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
200 लोगों की जिंदगी बचाने की जंग
धराली गांव में करीब 200 लोग अब भी फंसे हुए हैं, जिनमें स्थानीय ग्रामीण, पर्यटक और दुकानदार शामिल हैं।
इनमें से कई लोग मलबे के ढेरों के बीच खुद को सुरक्षित स्थानों पर बचाए हुए हैं, जबकि कुछ मलबे में दबे हो सकते हैं – यही सबसे बड़ा खतरा है।
रेस्क्यू टीमों को दोहरी चुनौती है:
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मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश,
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फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना — वो भी तब, जब हर कदम पर मौत का खतरा मंडरा रहा है।
मुख्यमंत्री खुद मोर्चे पर
मुख्यमंत्री धामी बुधवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे और धराली में फंसे लोगों, बचाव दलों और स्थानीय प्रशासन से संवाद किया। उन्होंने कहा:
“सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है, राहत-बचाव कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। जल्द ही वैकल्पिक मार्ग और संचार व्यवस्था भी बहाल की जाएगी।”
स्थिति पर एक नजर:
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फंसे लोग – 200+
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हेली रेस्क्यू – मौसम के कारण रुक-रुक कर जारी
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सड़क संपर्क – पूरी तरह ध्वस्त
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संचार – नेटवर्क फेल
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रेस्क्यू एजेंसियाँ – सेना, ITBP, SDRF, NDRF, पुलिस
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पीएमO – लगातार संपर्क में
