2027 की तैयारी: उत्तराखंड में तीसरी जीत की पटकथा लिखने में जुटी भाजपा

 

 

 

 

TMP :वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से रणनीतिक मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। लक्ष्य साफ है—उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी। केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सशक्त शासन मॉडल ने कई राज्यों में चुनावी इतिहास बदला है और इसी अनुभव को उत्तराखंड में दोहराने की तैयारी दिखाई दे रही है।

देश के राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भाजपा लगातार चुनाव जीतने में सफल रही है। महाराष्ट्र में भी पार्टी दूसरी बार सरकार बनाने में कामयाब हुई। यह संकेत देता है कि भाजपा ने एंटी-इनकंबेंसी की धार को कमजोर कर उसे प्रो-इनकंबेंसी में बदलने का फार्मूला विकसित कर लिया है।

स्थिर सरकार का संदेश, अटकलों पर विराम

उत्तराखंड में पिछले लगभग चार वर्षों के दौरान कई बार नेतृत्व परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता की चर्चाएं सामने आईं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इन अटकलों को सख्ती से खारिज किया। हाल ही में हुई भाजपा प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि अनावश्यक चर्चाएं संगठन को नुकसान पहुंचाती हैं और इनसे बचना आवश्यक है।

शाह का दौरा: संगठन और सरकार दोनों को धार

इसी रणनीति के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आगामी उत्तराखंड दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। बीते दिनों कानून-व्यवस्था, अंकिता भंडारी प्रकरण और अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस की सक्रियता बढ़ी है। ऐसे समय में शाह का दौरा न केवल संगठन को एकजुट करने बल्कि धामी सरकार के कामकाज पर भरोसा जताने का संकेत भी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दौरा भाजपा के चुनावी शंखनाद की शुरुआत भी हो सकता है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन भी संभावित माना जा रहा है, जिससे चुनावी माहौल और धार पकड़ सकता है।

उपलब्धियों के साथ मैदान में उतरेगी भाजपा

हरिद्वार में शाह के दौरे के दौरान धामी सरकार की उपलब्धियों को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनी लगाए जाने की भी तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सख्त कानून बनाने, दंगाइयों और मतांतरण के खिलाफ कड़े कदम उठाने जैसे फैसलों से अपनी स्पष्ट वैचारिक पहचान बनाई है।

इसके साथ ही सनातन परंपराओं को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के विरुद्ध चलाया गया ‘ऑपरेशन कालनेमि’ भी सरकार के सख्त रुख का प्रतीक बनकर उभरा है।

2027 का रोडमैप

भाजपा का फोकस साफ है—स्थिर नेतृत्व, निर्णायक फैसले और उपलब्धियों के आधार पर जनता के बीच जाना। 2027 के चुनाव में मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल को केंद्र में रखकर पार्टी एक बार फिर जनादेश हासिल करने की कोशिश करेगी।

राजनीतिक संकेत यही बता रहे हैं कि उत्तराखंड में मुकाबला भले ही तीखा हो, लेकिन भाजपा इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने के मूड में है।

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