नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर की सीमा के भीतर स्थित सभी शराब की दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने यह आदेश सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि को आधार बनाकर पारित किया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शराब विक्रेताओं और राजस्थान सरकार की ओर से दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए विवादित आदेश के प्रभाव और संचालन को स्थगित कर दिया।
पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट की चिंता वास्तविक है और सरकार को भविष्य में शराब नीति बनाते समय इस पहलू को गंभीरता से ध्यान में रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा—
“नोटिस जारी किया जाए। विवादित आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक रहेगी।”
राज्य सरकार का पक्ष
राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह निर्देश दे चुका है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर के भीतर शराब की दुकानें नहीं होनी चाहिए, लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब राजमार्ग शहरों और नगरपालिकाओं के भीतर से गुजरते हैं।
उन्होंने कहा कि बाद में इस आदेश को स्पष्ट करते हुए यह तय किया गया था कि नगरपालिका सीमाओं के भीतर स्थित शराब की दुकानों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
शराब विक्रेताओं की दलील
शराब विक्रेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने पक्षकारों को सुने बिना आदेश पारित कर दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। उन्होंने निर्देशों पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि—
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मामला सुजानगढ़ गांव से संबंधित था
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लेकिन उच्च न्यायालय ने पूरे राज्य के लिए व्यापक आदेश पारित कर दिया
हाई कोर्ट का आदेश
उल्लेखनीय है कि 24 नवंबर 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो महीने के भीतर राष्ट्रीय या राज्य राजमार्गों से 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी शराब दुकानों को हटाए या स्थानांतरित करे, भले ही वे किसी नगरपालिका क्षेत्र, स्थानीय निकाय या वैधानिक विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आती हों।
सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम रोक से फिलहाल राजस्थान में शराब दुकानों के संचालन को राहत मिली है, जबकि मामले की अंतिम सुनवाई अभी शेष है।
