विगत वर्षों के निवास प्रमाणपत्रों की जांच पर भाजपा का समर्थन, ‘डेमोग्राफी बदलने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई’

 

 

 

देहरादून: भाजपा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विगत तीन वर्षों में बने निवास प्रमाण पत्रों की जांच शुरू करने के निर्णय का स्वागत किया है। प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार राज्य की डेमोग्राफी बदलने की साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है और इस जांच से कालनेमि तथा उनके राजनीतिक शुभचिंतकों की सभी गलतफहमियां दूर हो जानी चाहिए।

मीडिया से बातचीत में भट्ट ने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है— राज्य के संसाधनों, योजनाओं और व्यवस्थाओं का लाभ केवल स्थानीय पात्र लोगों को मिले। यदि कोई उनके अधिकारों पर ‘डाका’ डाल रहा है या ऐसा प्रयास कर रहा है, तो उसे चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कुछ गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद ही मुख्यमंत्री ने तीन साल के दस्तावेजों की जांच का निर्णय लिया है, जो पूरी तरह स्वागत योग्य और समयानुकूल है।

कांग्रेस द्वारा दस्तावेज जांच की अवधि तीन वर्ष से अधिक बढ़ाने की मांग पर भट्ट ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को पूर्व की जांचों से कोई परहेज नहीं, लेकिन विपक्ष का यह तर्क राजनीतिक रूप से प्रेरित लगता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “असल दिक्कत कांग्रेस को तब आएगी, जब प्रदेश में चुनाव आयोग एसआईआर की प्रक्रिया शुरू करेगा।” बिहार में तुष्टिकरण की राजनीति के चलते जैसे विरोध हुए, वैसा ही रुख कांग्रेस यहाँ भी अपना सकती है।

भट्ट ने कांग्रेस पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के “खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग” हैं। दिल्ली में विचारों के पैमाने अलग, देहरादून में अलग, मैदान में अलग और पहाड़ में अलग— हर वर्ग और परिस्थिति के अनुसार उनका रुख बदलता रहता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जागरूक जनता कांग्रेस के इन कई ‘रूपों’ को भली-भांति पहचान चुकी है और अब उसके बहकावे में नहीं आने वाली।

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