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जौलीग्रांट एयरपोर्ट टेंडर विवाद: हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के आदेश पर लगाई रोक बरकरार

 

 

 

नैनीताल: देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर फूड एवं बेवरेज की दुकानें लगाने वाली कंपनी का टेंडर निरस्त करने के मामले में शुक्रवार को नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के आदेश पर लगी रोक को आगे भी बरकरार रखा है। अब इस मामले में अंतिम सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी।

क्या है मामला?

मनीष टैक्सी सर्विस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि एयरपोर्ट पर फूड एवं बेवरेज की करीब 12 दुकानों का संचालन करने के लिए उन्होंने 2023 में टेंडर डाला था। शर्तों के मुताबिक उन्हें यह ठेका 5 साल के लिए मिला था।

हालांकि, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जून 2025 में टेंडर निरस्त कर दिया। अथॉरिटी का कहना था कि कंपनी ने शर्तों के मुताबिक मासिक भुगतान नहीं किया। वहीं, याचिकाकर्ता का आरोप है कि भुगतान की राशि को एयरपोर्ट अथॉरिटी ने नियमों के विपरीत बढ़ा-चढ़ाकर थमाया, जिसके चलते भुगतान में देरी हुई।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि यह निरस्तीकरण टेंडर की शर्तों के खिलाफ है। फिलहाल हाईकोर्ट ने इस पर रोक जारी रखी है, जो अगली सुनवाई तक लागू रहेगी।

जौलीग्रांट एयरपोर्ट की अहमियत

देहरादून का जौलीग्रांट एयरपोर्ट उत्तराखंड का प्रमुख हवाई अड्डा है। यहां से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद सहित कई बड़े शहरों के लिए सीधी हवाई सेवा उपलब्ध है।

इंडिगो, एयर इंडिया, एलायंस एयर, एयर इंडिया एक्सप्रेस, स्पाइसजेट और फ्लाई बिग जैसी एयरलाइंस यहां से उड़ान भरती हैं। हाल ही में 15 सितंबर को एयर इंडिया एक्सप्रेस ने देहरादून-बेंगलुरु सीधी फ्लाइट सेवा शुरू की, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। यह सेवा युवाओं, उद्यमियों, आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और पर्यटकों के लिए नई सुविधा लेकर आई है।

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