उत्तराखण्ड ने केंद्र से मांगा ₹5702 करोड़ का आपदा राहत पैकेज, मानसून से भारी तबाही का हवाला

 

 

 

 

  • आपदा प्रबंधन विभाग ने गृह मंत्रालय को भेजा विस्तृत ज्ञापन
  • अप्रैल से अगस्त तक 79 मौतें और हजारों करोड़ की परिसंपत्ति क्षति का ब्यौरा

देहरादून:  इस साल मानसून ने उत्तराखण्ड में भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने गृह मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर ₹5702.15 करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। यह राशि न केवल हुई क्षति की भरपाई बल्कि भविष्य में आपदा से अवस्थापना संरचनाओं को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए भी मांगी गई है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से राज्य के विभिन्न विभागों को सीधी क्षति ₹1944.15 करोड़ की हुई है। इनमें—

  • लोक निर्माण विभाग एवं सड़कों को ₹1163.84 करोड़

  • सिंचाई विभाग को ₹266.65 करोड़

  • ऊर्जा विभाग को ₹123.17 करोड़

  • स्वास्थ्य विभाग को ₹4.57 करोड़

  • विद्यालयी शिक्षा को ₹68.28 करोड़

  • उच्च शिक्षा को ₹9.04 करोड़

  • ग्राम्य विकास को ₹65.50 करोड़

  • शहरी विकास को ₹4 करोड़

  • पशुपालन को ₹23.06 करोड़

  • अन्य विभागों को ₹213.46 करोड़

का नुकसान शामिल है।

इसके अतिरिक्त कई सड़कें, पुल, आबादी वाले क्षेत्र और अवस्थापना संरचनाएं आपदा की चपेट में आने की कगार पर हैं। इन्हें स्थिर और सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त ₹3758 करोड़ की मांग की गई है।

भारी जनहानि और संपत्ति क्षति

1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक आपदा से—

  • 79 लोगों की मौत

  • 115 घायल

  • 90 लोग लापता

  • 3953 पशुओं की मृत्यु

दर्ज की गई है।

इसके अलावा—

  • 238 पक्के भवन ध्वस्त

  • 2 कच्चे भवन ध्वस्त

  • 2835 पक्के भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त

  • 402 कच्चे भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त

हो चुके हैं। साथ ही कई दुकानें, होटल, होमस्टे, रेस्तरां और अन्य वाणिज्यिक संरचनाएं भी भारी नुकसान झेल चुकी हैं।

क्यों जरूरी है पैकेज

राज्य सरकार का कहना है कि यह पैकेज आपदा प्रभावित परिसंपत्तियों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और पुनर्प्राप्ति के लिए जरूरी है। साथ ही, भविष्य में संभावित आपदाओं से अवस्थापना संरचनाओं और आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

कुल मिलाकर, उत्तराखण्ड ने केंद्र से जो आर्थिक पैकेज मांगा है, वह राज्य को आपदा की विभीषिका से उबारने और भविष्य में बड़े नुकसान से बचाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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