देहरादून: शहर को महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों की सूची में शामिल करने वाली एक निजी डेटा साइंस कंपनी पी वैल्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट विवादों में आ गई है। पुलिस ने कंपनी के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक प्रहलात राउत को तीन दिन में तलब करते हुए सर्वे से जुड़े सभी तथ्यात्मक आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा है।
पुलिस जांच के घेरे में कंपनी
एसएसपी अजय सिंह ने मामले की जांच एसपी ऋषिकेश जया बलोनी को सौंपी है। उन्होंने कहा कि तथ्यों के परीक्षण के बाद कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
कंपनी की रिपोर्ट “नारी-2025” में देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में शामिल किया गया था। लेकिन पुलिस का कहना है कि—
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यह सर्वे राष्ट्रीय महिला आयोग या राज्य महिला आयोग द्वारा अनुमोदित नहीं है।
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कंपनी ने 12,770 महिलाओं से केवल टेलीफोनिक इंटरव्यू के आधार पर रिपोर्ट तैयार की, जबकि देहरादून में महिलाओं की आबादी करीब 9 लाख है।
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यानी मात्र 0.04% महिलाओं की राय पर आधारित रिपोर्ट तैयार की गई।
महिला आयोग भी सख्त
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने भी कंपनी को नोटिस भेजते हुए 8 सितंबर को देहरादून आकर जवाब देने को कहा है। साथ ही इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग को भी भेजी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
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यह रिपोर्ट पूरी तरह निजी कंपनी का आयोजन है।
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न तो राष्ट्रीय महिला आयोग और न ही राज्य महिला आयोग का इससे कोई संबंध है।
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रिपोर्ट को गलत तरीके से महिला आयोग के नाम से प्रचारित किया जा रहा है, जिससे देहरादून की छवि धूमिल करने का प्रयास हुआ है।
सरकार का रुख
महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि भले ही रिपोर्ट जारी करने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर मौजूद थीं, लेकिन सर्वे आयोग द्वारा नहीं कराया गया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील है और पुलिस द्वारा बनाए गए गौरा शक्ति ऐप में अब तक 1.25 लाख महिलाओं का पंजीकरण हुआ है, जिनमें 16,649 केवल देहरादून की महिलाएं शामिल हैं।
