देहरादून: उत्तरकाशी के धराली गांव में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद जहां राहत और बचाव कार्य जारी है, वहीं राजनीतिक बयानबाज़ी भी ज़ोर पकड़ने लगी है। इसी कड़ी में भाजपा सांसद और पूर्व मंत्री अजय भट्ट के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा: “जहां विकास होता है, वहां थोड़ी बहुत परेशानी होती है। बादल तो फटते रहते हैं, आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं।”
इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, खासकर कांग्रेस पार्टी ने इसे बेहद शर्मनाक और असंवेदनशील करार दिया है।
कांग्रेस का हमला: ‘भयावह आपदा में ऐसी टिप्पणी शर्मनाक’
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अजय भट्ट के बयान की निंदा करते हुए कहा:“प्रदेश के कई ज़िले आपदा की चपेट में हैं और धराली जैसी भीषण त्रासदी के बीच इस तरह का बयान एक जिम्मेदार सांसद को शोभा नहीं देता। यह बयान न सिर्फ संवेदनहीन है, बल्कि पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।”
धस्माना ने आरोप लगाया कि:
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भाजपा के सांसद जनता के दुख-दर्द से दूर रहते हैं,
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वे केवल धार्मिक ध्रुवीकरण के सहारे चुनाव जीतते हैं,
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और आपदा जैसे मामलों में जनभावनाओं की कद्र नहीं करते।
कांग्रेस ने उठाई मृतकों और लापता लोगों की संख्या सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि उत्तरकाशी के गंगोत्री क्षेत्र में हर्षिल-धराली आपदा में मृतकों और लापता लोगों की संख्या के आधिकारिक आंकड़े तुरंत जारी किए जाएं।
धस्माना ने कहा कि सरकार की चुप्पी से लोगों में भ्रम और चिंता बढ़ रही है।
धस्माना ने कहा: “यह संकट की घड़ी है और कांग्रेस पार्टी राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, लेकिन सरकार को भी अपनी जवाबदेही निभानी चाहिए।”
सियासत बनाम संवेदनशीलता — जनता पूछ रही है सवाल
धराली आपदा एक मानवीय त्रासदी है, जहां सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं या लापता हैं। ऐसे समय में नेताओं के बयान जनभावनाओं को झकझोरते हैं।
भाजपा सांसद अजय भट्ट के बयान को लेकर उठे विवाद ने यही सवाल खड़ा किया है कि क्या राजनीति में संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी अब खोती जा रही है?

