Harish Thapliyal :उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित धराली गांव उस वक्त चीखों और अफरातफरी में बदल गया जब खीरगंगा नदी में बादल फटने के बाद विनाशकारी बाढ़ आ गई। गंगोत्री धाम के इस प्रमुख पड़ाव पर आई इस आपदा ने न सिर्फ कई घरों और होटलों को अपने आगोश में लिया, बल्कि कई जिंदगियों को मलबे में दबा दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हालात को गंभीर बताते हुए सेना और राहत एजेंसियों को युद्धस्तर पर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
◆ तबाही का मंजर:
धराली गांव में सोमवार तड़के बादल फटने से खीरगंगा नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी के तेज बहाव और भारी मलबे के साथ बाढ़ का पानी धराली मार्केट क्षेत्र में घुस गया। देखते ही देखते 25 से अधिक होटल और होमस्टे तबाह हो गए। कई मकान और दुकानें मलबे में समा गईं।
◆ भागने तक का मौका नहीं मिला:
स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ इतनी तेज थी कि किसी को संभलने या बचने का मौका तक नहीं मिला। “भागो-भागो” की चीखें बाढ़ की गड़गड़ाहट में दब गईं। चंद मिनटों में ही पूरा धराली बाजार तबाही के निशान में तब्दील हो गया।
◆ लोग मलबे में दबे होने की आशंका:
मौके से मिल रही जानकारी के अनुसार कई लोग अब भी लापता हैं और मलबे में दबे होने की आशंका है। SDRF, आर्मी और पुलिस राहत-बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। बटवाड़ी से विशेष टीमें मौके पर रवाना हो चुकी हैं।
◆ मुख्यमंत्री ने जताई चिंता:
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने घटना को लेकर गहरा दुख जताया और कहा कि राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटी है। “सेना, NDRF और SDRF की टीमें मौके पर मौजूद हैं, प्रभावितों को हर संभव मदद दी जाएगी।”
◆ प्रशासन की अपील:
उत्तरकाशी पुलिस और जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी के किनारे जाने से बचें, अपने बच्चों और मवेशियों को भी दूर रखें। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसी भी तरह की लापरवाही घातक हो सकती है।
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धराली में आई यह आपदा एक बार फिर उत्तराखंड की पहाड़ी नदियों के विकराल रूप की याद दिलाती है। प्रकृति के इस प्रकोप में जहां इंसानी जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं एकजुटता और त्वरित राहत ही इस संकट से निकलने का रास्ता है। स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रशासन द्वारा रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया गया है।
