TMP: डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका में इमीग्रेशन और वीजा नियम सख्त कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर भारतीय छात्रों पर पड़ रहा है। वीजा अपॉइंटमेंट स्लॉट की कमी और वीजा रिजेक्शन के कारण छात्रों की अमेरिका जाने की संख्या में 70-80% तक गिरावट की आशंका जताई गई है। पिछले साल 3.3 लाख से अधिक छात्र अमेरिका गए थे, लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से गिर रहा है।
अब तक की सबसे खराब स्थिति, छात्र हर दिन कर रहे पोर्टल चेक
हैदराबाद ओवरसीज़ कंसल्टेंट के संजीव राय ने बताया कि यह स्थिति बीते वर्षों में अब तक की सबसे खराब है। छात्र हर दिन स्लॉट खुलने की उम्मीद में पोर्टल को रिफ्रेश कर रहे हैं, लेकिन अपॉइंटमेंट कन्फर्मेशन नहीं मिल रहा। आम तौर पर इस समय तक छात्र वीजा इंटरव्यू पूरा कर अमेरिका जाने की तैयारी कर लेते थे।
दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे छात्र
अमेरिकी दूतावास में वीजा प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों को देखते हुए कई छात्र अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। विंडो ओवरसीज़ एजुकेशन कंसल्टेंसी के अंकित जैन ने बताया कि कई छात्रों ने स्लॉट बुक कर लिया है, लेकिन उन्हें कन्फर्मेशन नहीं मिला है।
214B के तहत हो रहा वीजा रिजेक्शन
आई20 फीवर कंसल्टेंसी के अरविंद मंडुवा ने बताया कि इस साल अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या में 80% तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। कई छात्रों ने इंटरव्यू पूरा कर लिया था, लेकिन उनके वीजा रिजेक्ट कर दिए गए। अधिकतर मामलों में वीजा रिजेक्शन का कारण यूएस इमीग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 214(b) बताया जा रहा है, जो तब लगाई जाती है जब आवेदक यह साबित नहीं कर पाता कि वह यात्रा के बाद अपने देश लौट आएगा।
महावाणिज्य दूतावास ने दी सफाई
हैदराबाद स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास ने कहा है कि आवेदकों की गहन जांच जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका अमेरिका या अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं है।
