एएनआई: भारत, चीन और रूस के बीच संभावित त्रिपक्षीय सहयोग वार्ता (आरआईसी) को लेकर हाल ही में अटकलें तेज थीं, लेकिन सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में आरआईसी प्रारूप में किसी बैठक पर सहमति नहीं बनी है। सूत्रों के मुताबिक, इस समय किसी नई वार्ता के कार्यक्रम को लेकर भी तीनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं चल रही है।
विदेश मंत्रालय ने बताया था आरआईसी का उद्देश्य
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि आरआईसी का उद्देश्य वैश्विक और क्षेत्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर तीनों देशों को एक मंच पर लाना है। उन्होंने यह भी कहा था कि भविष्य में बैठक पर निर्णय लेने के लिए भारत, चीन और रूस आपस में चर्चा कर रहे हैं। भारत पहले भी आरआईसी तंत्र के माध्यम से बहुपक्षीय मुद्दों पर खुलकर बातचीत का पक्षधर रहा है।
नाटो प्रमुख की चेतावनी के बाद तेज हुईं चर्चा
आरआईसी वार्ता की अटकलें उस समय बढ़ीं जब नाटो प्रमुख ने ब्रिक्स देशों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति वार्ता के लिए तैयार करने की चेतावनी दी। नाटो प्रमुख ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो भारत, चीन और ब्राजील को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसके बाद माना जा रहा था कि आरआईसी वार्ता के जरिए भारत इस मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
भारत की रणनीति में संतुलन बनाए रखने पर जोर
भारत ने लगातार अपनी विदेश नीति में रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। भारत रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंधों को मजबूत बनाए हुए है, जबकि चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भी बहुपक्षीय मंचों पर संवाद जारी रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आरआईसी वार्ता यदि आगे बढ़ती है, तो यह भारत के लिए चीन और रूस दोनों के साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखने का अवसर दे सकती है।
