नैनीताल: हरिद्वार और देहरादून में व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस सेंटर शहर से 20 से 30 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किए जाने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग से 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार को वाहन मालिकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना होगा।
मामले में हरिद्वार टैक्सी ऑनर एसोसिएशन, दून रिक्शा ऑनर संघ और स्कूल वाहन प्रबंधकों सहित कई संगठनों ने याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शहर से दूर फिटनेस सेंटर बनाए जाने से उन्हें टोल टैक्स, ईंधन खर्च और समय की भारी बर्बादी झेलनी पड़ रही है।
देहरादून में वाहन मालिकों को आशारोड़ी से लालतप्पड़ तक जाना पड़ रहा है, जबकि हरिद्वार में भी सेंटर 30 किमी दूर कर दिया गया है। इससे न केवल व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं और स्कूली बच्चों के परिवहन पर भी असर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया है कि फिटनेस सेंटर एआरटीओ कार्यालय के पास ही स्थापित किए जाएं, ताकि वाहन मालिकों और आमजन को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि इस विषय में कई बार प्रशासन और आरटीओ को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।
