TMP: महानगरों का आकर्षण अब फीका पड़ रहा है। अब देश की युवा पीढ़ी, खासकर जनरेशन Z, रोजगार और पढ़ाई के लिए महानगरों की भीड़भाड़ छोड़कर टियर-2 शहरों की ओर रुख कर रही है। इसकी वजह तेजी से बढ़ता रिमोट वर्क कल्चर, किफायती जीवन और छोटे शहरों में बढ़ते रोजगार के अवसर हैं।
रिमोट वर्क और इंटरनेट स्पीड ने बदली सोच
अब मेलूर, नागपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर जैसे शहरों में भी शानदार इंटरनेट स्पीड, अच्छे कैफे और सहूलियतें मौजूद हैं। स्मार्ट सिटीज मिशन और SEZ विकास से इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधरा है, रोजगार बढ़ा है और रहने के लिए साफ-सुथरा माहौल मिल रहा है।
Genpact, HCL Tech, Cognizant और Infosys जैसी कंपनियां भी अब छोटे शहरों में ऑफिस खोल रही हैं।
रोजगार के अवसर 42% बढ़े, खर्च कम
रैंडस्टैड 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-2 शहरों में नौकरियों में 42% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मेट्रो शहरों में यह वृद्धि केवल 19% रही। यहां कर्मचारी भले ही मेट्रो के मुकाबले 25-35% कम सैलरी पाते हैं, लेकिन वहां के कम खर्च की वजह से पैसों की बचत ज्यादा हो रही है।
छोटे शहरों में शिक्षा और करियर के अवसर बढ़े
जयपुर, पुणे और वडोदरा जैसे शहरों में इंजीनियरिंग संस्थानों और स्किल सेंटर बढ़ रहे हैं, जिससे शिक्षा और करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं। सांस्कृतिक समृद्धि, बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और परिवार के करीब रहने का विकल्प युवाओं को छोटे शहरों में बसने के लिए प्रेरित कर रहा है।
जैसे-जैसे रिमोट वर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग आगे बढ़ रहा है, छोटे शहरों में रहने का यह ट्रेंड भारत में नई शहरीकरण तस्वीर बना रहा है।
