भूपेंद्र यादव ने किया उद्घाटन, बोले – पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक सोच से सजेगा विकसित भारत

 

 

देहरादून: भारतीय वन्यजीव संस्थान में तीन दिवसीय ‘इंडियन कंजरवेशन कॉन्फ्रेंस (ICCON 2025)’ का भव्य आगाज़ हुआ, जिसका उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया। इस सम्मेलन ने देशभर के शोधकर्ताओं, वन अधिकारियों, छात्रों और संरक्षण विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण के भविष्य पर मंथन शुरू किया।

भविष्य की नींव आज रखनी होगी: केंद्रीय मंत्री

अपने उद्घाटन भाषण में यादव ने स्पष्ट किया कि भारत अब जैव विविधता संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2014 में जहां 47 टाइगर रिजर्व थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 58 हो गई है। रामसर स्थलों की संख्या भी 25 से बढ़कर 91 तक पहुंच चुकी है, जो भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

परंपरा + तकनीक + समुदाय = भारत का संरक्षण मॉडल

मंत्री ने “मिष्ठी, अमृत धरोहर, और ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम” जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का विकास मॉडल परंपरा, तकनीक और समुदायों की साझेदारी पर आधारित है, जो विकास और संरक्षण को साथ लेकर चलता है।

“बाघ अभयारण्य के बाहर बाघ” – एक नई चुनौती

भूपेंद्र यादव ने इंसान और वन्यजीव संघर्ष को लेकर चिंता जताई और कहा कि ‘बाघ अभयारण्य के बाहर बाघ’ अब एक नई चुनौती बनकर उभरा है, जिसे दूर करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

ICCON 2025 – विचारों और विज्ञान का संगम

कॉन्फ्रेंस की शुरुआत डॉ. बिलाल हबीब के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें कार्यक्रम की दिशा और उद्देश्यों को साझा किया गया। आईआईएसईआर त्रिवेंद्रम की प्रोफेसर डॉ. हेमा सोमनाथन ने मधुमक्खियों की संवेदी और संज्ञानात्मक क्षमताओं पर व्याख्यान दिया — यह दर्शाता है कि प्राकृतिक व्यवहारों को समझे बिना संरक्षण अधूरा है

संरक्षण केवल दस्तावेज नहीं, लोकाचार है

भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक वीरेंद्र तिवारी और डीन डॉ. रुचि बडोला ने भी सम्मेलन की सार्थकता पर प्रकाश डाला। वन महानिदेशक सुशील अवस्थी ने इसे मंत्रालय की “साक्ष्य आधारित और समावेशी नीति निर्माण” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

ICCON 2025 न केवल संरक्षण का मंच है, बल्कि यह विकसित भारत 2047 की संकल्प यात्रा में पर्यावरण और वन्यजीवों के साथ संतुलन का संदेश भी है। यहां से उठने वाले विचार भारत को वैश्विक ‘ग्रीन नेतृत्व’ की दिशा में आगे बढ़ाने में मील का पत्थर बनेंगे।

 
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