नई दिल्ली: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भेंट कर उत्तराखंड से जुड़े अहम मसलों पर विस्तार से चर्चा की। राज्य के सांस्कृतिक, रणनीतिक और पर्यटन विकास से जुड़े मुद्दों पर की गई यह बैठक प्रदेश के लिए दूरगामी प्रभाव वाली मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से रानीखेत और लैंसडाउन छावनी क्षेत्रों को संबंधित नगर पालिकाओं के साथ विलय करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन और स्थानीय जनसुविधाओं के विकास को नई दिशा मिलेगी और प्रशासनिक जटिलताओं में भी कमी आएगी।
धामी ने रक्षा मंत्री से यह भी आग्रह किया कि धारचूला और जोशीमठ के सैन्य हेलीपैड को उड़ान योजना (RCS) के अंतर्गत नागरिक हवाई सेवा के रूप में उपयोग की अनुमति दी जाए, जिससे सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बल मिलेगा।
राज्य में आपदा के समय भारतीय वायुसेना द्वारा की जाने वाली राहत सेवाओं के लिए लगने वाले शुल्क को माफ करने का भी अनुरोध किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आपदाएं बार-बार आती हैं और वायुसेना की भूमिका अमूल्य होती है, ऐसे में वित्तीय भार कम करना राज्य की जरूरत है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से ग्वालदम-नंदकेसरी-थराली-देवाल-मुंदोली-वाण मार्ग का अनुरक्षण भविष्य में भी लोक निर्माण विभाग (PWD) से ही कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मार्ग 2026 में प्रस्तावित भव्य नंदा देवी राजजात यात्रा का मुख्य रूट है, जो राज्य की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान से जुड़ा है।
बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती और धार्मिक रूप से समृद्ध राज्य के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह बैठक न केवल राज्य के विकास, बल्कि रक्षा और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में केंद्र-राज्य समन्वय का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है।

