सौर सखी’ बनेंगी आत्मनिर्भरता की रोशनी: मुख्यमंत्री धामी ने सौर स्वरोजगार योजना को दी नई उड़ान

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड की पहाड़ियों से अब उजाला सिर्फ सूरज नहीं, ‘सौर सखियों’ के आत्मनिर्भर प्रयास भी फैलाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के विकासकर्ताओं के साथ संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया और योजना से जुड़ी महिलाओं को ‘सौर सखी’ का विशेष सम्मानजनक नाम देने की घोषणा की।

महिलाओं को सशक्त बनाएगी ‘सौर सखी’ पहल

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब सौर ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान और सम्मान मिलेगा। ‘सौर सखियां’ न केवल सौर संयंत्रों को स्थापित करेंगी, बल्कि उनका संचालन और रखरखाव भी संभालेंगी। इसके लिए जनपद स्तर पर प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

सौर ऊर्जा का नया कीर्तिमान

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक 250 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है और वर्ष 2027 तक इसे 2500 मेगावाट तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा एक असीमित और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोत है, जिसे बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नई सौर ऊर्जा नीति भी लागू की है।

रूफटॉप से लेकर खेत तक, सौर शक्ति सबके साथ

राज्य में रूफटॉप सोलर प्लांट्स को विशेष सब्सिडी, 20 से 50 प्रतिशत अनुदान, और 4% ब्याज सब्सिडी पर ऋण जैसी सहूलियतें दी जा रही हैं। महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति और दिव्यांगजनों को अतिरिक्त 5% अनुदान भी मिलेगा। यूपीसीएल के साथ 25 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट सोलर उद्यमियों को स्थायित्व का भरोसा देता है।

ऑनलाइन पोर्टल से आसान बनी प्रक्रिया

पूरा आवेदन और आवंटन तंत्र अब तकनीकी रूप से दक्ष और पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिससे इच्छुक लोग आसानी से जुड़ सकें।

‘लोकल फॉर वोकल’ से आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा कि भारत आज 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। ‘वोकल फॉर लोकल, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया’ जैसे अभियानों से देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उत्तराखंड में ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी योजनाओं से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई उड़ान मिल रही है।

जन-संवाद में झलकी योजना की सफलता

उत्तरकाशी के शैलेन्द्र सिंह ने इस योजना को बंजर ज़मीन के सदुपयोग का कारगर माध्यम बताया, वहीं चमोली के विकास मोहन ने विकासखंड स्तर तक प्रचार की आवश्यकता जताई। पौड़ी की रूपा रानी ने महिलाओं के लिए विशेष रणनीति बनाने की बात रखी और चम्पावत के केतन भारद्वाज ने रख-रखाव प्रशिक्षण की ज़रूरत को रेखांकित किया।

 

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