चुनाव प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव: हर बूथ पर 1200 मतदाता की सीमा, ऊंची इमारतों में अलग बूथ और लॉन्च हुआ ‘ईसीआईनेट’

 

 

 

देहरादून : भारत निर्वाचन आयोग ने देश में मतदान प्रक्रिया को और अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक और तकनीकी फैसले लिए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने इन नए प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि आयोग ने मतदाताओं की सुविधा, राजनीतिक सहभागिता और तकनीकी सुदृढ़ता को प्राथमिकता दी है।

1200 मतदाताओं तक सीमित हुआ एक बूथ, ऊंची इमारतों में मिलेंगे अतिरिक्त केंद्र

अब से प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं को ही शामिल किया जाएगा। खासकर ऊंची इमारतों और घनी कॉलोनियों में अलग से मतदान केंद्र बनाए जा सकेंगे, जिससे लंबी कतारों और असुविधा से बचा जा सकेगा।

मतदाता सूची अब होगी और सटीक: मृत्यु पंजीकरण डेटा सीधे जोड़ा जाएगा

अब मृत्यु पंजीकरण का डेटा सीधे आरजीआई (Registrar General of India) के डेटाबेस से प्राप्त कर उसे स्वचालित सत्यापन के बाद मतदाता सूची से हटाया जाएगा, जिससे डुप्लीकेट और अप्रासंगिक वोटरों की संख्या में कमी आएगी।

वोटर इनफॉर्मेशन स्लिप होगी ज्यादा उपयोगी

अब मतदाता स्लिप में क्रम संख्या और भाग संख्या को और स्पष्ट और प्रमुख रूप से दिखाया जाएगा, जिससे मतदाता को बूथ पर पहुंचने और अपना नाम ढूंढ़ने में आसानी हो।

ईसीआईनेट डैशबोर्ड: 40 से अधिक सेवाएं अब एक प्लेटफॉर्म पर

डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने एक नया एकीकृत डैशबोर्ड ‘ईसीआईनेट’ शुरू किया है, जिसमें 40 से अधिक ऐप और वेबसाइट को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इससे प्रत्याशी, अधिकारी, मतदाता और राजनीतिक दल, सभी को एक जगह से सेवाएं मिलेंगी।

28 हितधारकों के लिए बन रही विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल

चुनाव प्रणाली में शामिल 28 प्रमुख हितधारकों – जैसे मतदाता, अधिकारी, राजनीतिक दल, उम्मीदवार आदि – के लिए अधिनियमों, नियमों और निर्देशों के आधार पर व्यवस्थित प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं।

सर्वदलीय संवाद: 4700 से अधिक बैठकें, 28,000 प्रतिनिधियों की भागीदारी

देशभर में निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ संवाद को प्राथमिकता देते हुए अब तक 4719 बैठकें की हैं, जिनमें 28,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उत्तराखंड में भी सीईओ स्तर पर 2, डीईओ स्तर पर 13, और ईआरओ स्तर पर 70 बैठकें हो चुकी हैं।

डुप्लीकेट वोटर ID की समस्या का समाधान

अब प्रत्येक मतदाता के लिए विशिष्ट EPIC नंबर की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे डुप्लीकेट आईडी की समस्या समाप्त होगी और मतदाता पहचान अधिक सटीक होगी।

नए सुधारों के साथ भारत निर्वाचन आयोग न केवल चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बना रहा है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए तकनीक और संवाद को एक नई दिशा दे रहा है।

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