पूर्व विधायक सुरेश राठौर को हाईकोर्ट से फिलहाल नहीं मिली राहत, राज्य सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

 

 

 

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने राज्य सरकार को मामले में 8 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी इसी दिन होगी।

सुनवाई के दौरान राठौर की ओर से अदालत को बताया गया कि उनके खिलाफ देहरादून के डालनवाला और नेहरू कॉलोनी थानों में दो मुकदमे दर्ज हैं। वहीं हरिद्वार में दर्ज दो अन्य मामलों को हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका है। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना कार्रवाई कर सकती है, जिससे गिरफ्तारी की आशंका है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत की मांग की गई।

सोशल मीडिया पर ऑडियो-वीडियो प्रसारित करने का मामला

यह मामला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी के नाम पर आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से संबंधित है। शिकायतकर्ताओं आरती गौड़ और भाजपा नेता दुष्यंत गौतम का आरोप है कि इन सामग्रियों के प्रसारण से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

इससे पहले हाईकोर्ट हरिद्वार में दर्ज दो मामलों को समाप्त कर चुका है, जबकि देहरादून में दर्ज मुकदमों में विस्तृत जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए थे।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि बिना ठोस साक्ष्य के किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया के माध्यम से किसी गंभीर अपराध से जोड़ना उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने जैसा गंभीर मामला है। अदालत ने कहा था कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो उसे संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी की छवि धूमिल करने या राजनीतिक उद्देश्य से किया जाए।

फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट तलब की है और उसके बाद ही अग्रिम जमानत याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।

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