मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के दोषी संजय सिंह की मानसिक स्थिति पर अहम फैसला

 

 

 

 

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टिहरी के चर्चित तिहरे हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए संजय सिंह को लेकर अहम आदेश दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने विचारण अदालत की ओर से सुनाई गई फांसी की सजा निरस्त करते हुए राज्य सरकार को दोषी का मानसिक उपचार कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, उपचार के बाद स्वस्थ होने पर उसे रिहा किया जाए।

मामले में हाईकोर्ट ने पहले यह सवाल उठाया था कि वारदात के समय अभियुक्त किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित तो नहीं था और मृत्युदंड सुनाते समय उसकी मेडिकल स्थिति पर पर्याप्त विचार किया गया था या नहीं। इसी पहलू की जांच के लिए मामला विचारण अदालत को वापस भेजा गया था।

मेडिकल रिपोर्ट में मानसिक बीमारी का उल्लेख

सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि संजय सिंह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। उनके अनुसार, मेडिकल बोर्ड ने भी उसे मानसिक बीमारी से पीड़ित बताया था और कहा था कि वह अपने कृत्य के परिणामों को समझने में सक्षम नहीं था, हालांकि उपचार से उसके ठीक होने की संभावना है।

इससे पहले विचारण अदालत ने दोबारा सुनवाई के बाद अभियुक्त को स्वस्थ बताते हुए मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी थी। अब हाईकोर्ट ने सजा निरस्त कर मानसिक उपचार और उसके बाद रिहाई के निर्देश दिए हैं।

13 दिसंबर 2014 को हुआ था तिहरा हत्याकांड

मामला टिहरी गढ़वाल के गुमाल गांव का है। अभियोजन के अनुसार, 13 दिसंबर 2014 को संजय सिंह ने अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या कर दी थी। घटना की रिपोर्ट उसके पिता राम सिंह पंवार ने दर्ज कराई थी।

अगस्त 2021 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने संजय सिंह को तिहरे हत्याकांड में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अपील में अभियुक्त की मानसिक स्थिति और मेडिकल रिपोर्ट प्रमुख मुद्दे बने।

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