SIR विवाद के बीच राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

photo- pti

 

 

 

नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वोट की सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके खिलाफ उठाए गए सवाल सही हैं तो उन्हें पूरे मामले में सरकारी गवाह बनना चाहिए। ये राहुल गांधी के आरोप हैं; निर्वाचन आयोग ने रिपोर्ट में लगाए गए आंतरिक मतभेद के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।

 

मैं तीन साल से वोट चोरी का पर्दाफ़ाश करता आ रहा हूँ। अब चुनाव आयुक्त खुद इसे स्वीकार कर सच्चाई उजागर कर रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार ने देशद्रोह किया है। वो अभी इस्तीफ़ा दें और approver बन जाएं।

वोट चोरी की साज़िश में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पूरी जांच होगी। pic.twitter.com/l7K0e1fSua

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 24, 2026

 

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर भी उठे सवाल

यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक पहुंच, मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और पश्चिम बंगाल में अपील से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ होने की आपत्ति दर्ज की थी। वहीं चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।

मोदी-शाह के पुराने बयानों का भी किया जिक्र

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुराने भाषणों के वीडियो भी चलाए। उन्होंने भाजपा के लंबे समय तक सत्ता में रहने से जुड़े बयानों का हवाला देते हुए चुनावों में एंटी-इनकंबेंसी के मुद्दे पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कहा कि आम तौर पर सरकारों के खिलाफ समय के साथ सत्ता विरोधी माहौल बनता है, लेकिन उनके अनुसार नरेंद्र मोदी और भाजपा के संदर्भ में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने इसी सवाल को मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया।

SIR और वोटर लिस्ट को लेकर क्या है विवाद?

रिपोर्ट के मुताबिक SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से जुड़े डेटा के संचालन और नियंत्रण को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर चिंता दर्ज की। इनमें मतदाता सूची के डेटाबेस के केंद्रीकरण और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच से जुड़े सवाल भी शामिल थे।

इस बीच SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कुछ प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर जारी नोटिसों को लेकर अदालत ने निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।

राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में युवा मतदाताओं और वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों और आंतरिक मतभेद संबंधी रिपोर्टों पर अलग पक्ष सामने रखा गया है।

(Visited 7 times, 1 visits today)