वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत का फोकस आत्मनिर्भरता पर, 100 आयातित वस्तुओं की पहचान शुरू

 

 

 

 

नई दिल्ली: दुनिया के 50 से अधिक देशों के साथ व्यापार शुल्क में अमेरिका की बदलती नीति और वैश्विक व्यापारिक उथल-पुथल ने भारत के स्वदेशी अभियान को नई गति दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद अब केंद्र सरकार ने उन वस्तुओं की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है जिन्हें देश में ही बनाया जा सकता है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।

वाणिज्य मंत्रालय की पहल

वाणिज्य मंत्रालय ने शुरुआती स्तर पर 100 ऐसे आइटम की पहचान की है जिनके आयात को रोका जा सकता है। साथ ही, उन कच्चे माल की भी पड़ताल की जा रही है जिनके लिए भारत घरेलू विकल्प तैयार कर सकता है। मंत्रालय का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, और सफलता मिलने पर इसे एक बड़े स्वदेशी अभियान का रूप दिया जाएगा।

आयात-निर्यात का असंतुलन

भारत का आयात हमेशा निर्यात से अधिक रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर फार्मा सेक्टर तक, कई कच्चे माल के लिए भारत विदेशी बाज़ारों पर निर्भर है। अब सरकार का लक्ष्य है कि गुणवत्ता नियमों को सख्ती से लागू करके इन वस्तुओं के आयात को कम किया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। छोटे-छोटे आइटम्स का उत्पादन स्थानीय उद्यमियों से कराने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

छोटे उद्योगों के लिए अवसर

मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के तहत सरकार छोटे उद्यमियों को आयातित वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के लिए प्रोत्साहन और मदद देगी। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 2-3 वर्षों में वैश्विक व्यापारिक नीतियों में हुए बदलाव के चलते 800 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ है। ऐसे में भारत के पास आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर है।

व्यापारिक चुनौतियां और आत्मनिर्भरता

हाल ही में अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 50% शुल्क लगाया, जबकि चीन ने भारत को मिलने वाली रेयर अर्थ मैगनेट सप्लाई रोक दी। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारत को अपनी खपत पैटर्न बदलकर घरेलू स्तर पर निर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।

सरकार का फोकस

मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्वदेशी अभियान को गति दें और आयात पर निर्भरता घटाने में सहयोग करें। रेयर अर्थ मिनरल्स के उत्पादन के लिए विशेष वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

मंगलवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सीआईआई (CII) के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत का मुख्य फोकस आत्मनिर्भरता है, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के बीच देश की सप्लाई चेन सुरक्षित और मजबूत बनी रहे।

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