नई दिल्ली: भारत वर्ष 2026 में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों में पूरी ताकत लगा रहा है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने BRICS संगठन के नए संभावित सदस्यों को चेतावनी दी है कि उन्हें शामिल होने पर अधिक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिली के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “जो भी देश BRICS में शामिल होना चाहेगा, उस पर अमेरिकी शुल्क अधिक लगाया जाएगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि BRICS संगठन अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि BRICS किसी भी सदस्य देश पर अपनी मुद्रा का दबाव नहीं बना रहा है। संगठन के सदस्य देश आपसी मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन किसी एक मुद्रा को लागू करने की नीति नहीं है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि कुछ सदस्य देशों ने संगठन को छोड़ने का निर्णय लिया है। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि 2024 में BRICS ने मिस्र, ईरान, सऊदी अरब, अर्जेंटीना, UAE और इथियोपिया को नए सदस्य के रूप में शामिल किया। इसमें से कुछ देशों ने पूर्ण सदस्यता नहीं ली है, जबकि अन्य आमंत्रित सदस्यों के तौर पर जुड़े हैं।
भारत इस बार सम्मेलन में पूर्णकालिक दस सदस्य देशों के अलावा अन्य इच्छुक रणनीतिक सहयोगियों को भी आमंत्रित करने की योजना बना रहा है। फिलहाल तीन दर्जन से अधिक देशों ने सदस्यता लेने की इच्छा जताई है, जिसमें कई दक्षिण एशियाई देश भी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारत जी-20 सम्मेलन की भव्य तैयारी जैसा ही BRICS सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग को आगामी बैठक के लिए आमंत्रित किया है।
इस तरह भारत ने BRICS सम्मेलन की तैयारियों में रणनीतिक और समन्वित दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं।
