आपदा का असर: ठप पड़ा देहरादून का पर्यटन कारोबार, 90% होटल खाली

Photo: The Financial Express

 

 

 

देहरादून:  जिले में आई आपदा को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन पर्यटन कारोबार अब तक पटरी पर नहीं लौटा। आपदा में सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से पर्यटकों की आवाजाही लगभग थम गई है। देहरादून, सहस्रधारा, मसूरी, ऋषिकेश और चकराता जैसे प्रमुख स्थलों के होटलों में ऑक्यूपेंसी 10 प्रतिशत से भी कम रह गई है।

कारोबारियों की बड़ी चिंता

होटल कारोबारियों के सामने कर्मचारियों की तनख्वाह और बिजली के बिल तक चुकाना मुश्किल हो गया है। नदियों के किनारे बने होटल, कैफे, रेहड़ी और दुकानें तो पूरी तरह से बह गई हैं। लीज और किराए पर होटल लेने वालों पर सबसे अधिक संकट है।

त्योहारों से पहले टूटी उम्मीद

आपदा से पहले होटल व्यवसायियों को नवरात्र और दशहरे के मौके पर पर्यटकों की आमद से राहत की उम्मीद थी। कई होटलों ने पहले से स्टाफ बढ़ाकर तैयारियां की थीं। लेकिन आपदा ने सारी तैयारियों और उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

भारी डिस्काउंट भी बेअसर

पर्यटकों को वापस आकर्षित करने के लिए होटलों ने 50 से 60 प्रतिशत तक डिस्काउंट की पेशकश शुरू की है। ऋषिकेश में तो होटल के कमरे धर्मशालाओं की कीमत (₹500–₹1000) तक मिल रहे हैं। इसके बावजूद बुकिंग नहीं हो रही और होटल खाली पड़े हैं।

पर्यटन स्थलों को भी नुकसान

आपदा ने केवल होटलों को ही नहीं बल्कि पर्यटन स्थलों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। देहरादून के गुच्चुपानी में पर्यटन विभाग की कैंटीन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। शहंशाही से झड़ीपानी-मसूरी जाने वाला ट्रैक खराब हो गया। मालदेवता, सहस्रधारा और मसूरी रोड पर मौजूद कई दुकानें व रेहड़ियां आपदा के सैलाब में बह गईं। छोटे कारोबारियों के लिए फिर से खड़ा होना बड़ी चुनौती है।

कारोबारियों की पीड़ा

  • “आपदा समाप्त होने के बावजूद होटल कारोबार पटरी पर नहीं लौटा। कर्मचारियों की तनख्वाह निकालना मुश्किल हो रहा है। होटलों में 10 प्रतिशत भी आक्यूपेंसी नहीं बची।” – सुरेश चंद्र गिल्होत्रा, अध्यक्ष, दून होटल एसोसिएशन

  • “आपदा के दौरान समस्या हुई थी। लेकिन अब मार्ग सुचारु होने से पर्यटकों की आमद शुरू हो गई है। पर्यटक अब सुरक्षित हैं और यातायात सामान्य है।” – संजय अग्रवाल, अध्यक्ष, मसूरी होटल एसोसिएशन

  • “आपदा थमने के बावजूद अधिकांश होटल खाली पड़े हैं। लीज में होटल लेने वालों को सबसे अधिक समस्या है।” – मदन गोपाल, अध्यक्ष, ऋषिकेश होटल एसोसिएशन

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