पाकिस्तान में सत्ता को लेकर फिर हलचल, आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत के बीच इमरान खान पर भी चर्चा

 

 

 

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर अस्थिरता के दौर में जाती दिख रही है। सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बढ़ती भूमिका, सरकार के कामकाज पर उठते सवाल और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सामने आ रही चर्चाओं ने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

पाकिस्तान में फिलहाल सीधे सैन्य शासन की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सत्ता के गलियारों में सेना की भूमिका को लेकर अटकलें लगातार तेज हो रही हैं।

गृह मंत्री के बयान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का हालिया बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने देश की मौजूदा शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि सिस्टम जिस तरह चल रहा है, उससे हालात संभालना मुश्किल हो रहा है।

नकवी को पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है। ऐसे में उनके बयान को केवल सामान्य राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जा रहा। विपक्षी नेताओं ने भी इसे लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने नकवी की टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अभी से खुद को बड़ा समझने लगे हैं।

इमरान खान को लेकर भी पर्दे के पीछे हलचल?

दूसरी तरफ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर भी नई अटकलें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उनकी रिहाई को लेकर पर्दे के पीछे संपर्क या बातचीत की कोशिशें हो सकती हैं।

इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं। उनकी पार्टी लगातार उनकी रिहाई की मांग करती रही है। ऐसे में अगर उन्हें रिहा किया जाता है तो इसका सीधा असर पाकिस्तान के मौजूदा राजनीतिक समीकरण पर पड़ सकता है।

हालांकि, इमरान खान और सेना के बीच किसी संभावित समझौते या उनकी रिहाई को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

क्या सेना बदलना चाहती है सत्ता का समीकरण?

पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक प्रभाव कोई नई बात नहीं है। देश के इतिहास में कई बार सैन्य नेतृत्व सीधे सत्ता में आया है और कई बार निर्वाचित सरकारों के पीछे सेना की निर्णायक भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं।

मौजूदा हालात में भी राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर होती संस्थागत व्यवस्था और सत्ता संघर्ष के बीच सेना की भूमिका पर नजर बनी हुई है।

कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों और राजनीतिक विश्लेषकों के दावों के मुताबिक, सेना इमरान खान के मुद्दे का ऐसा समाधान चाहती है जिससे राजनीतिक तनाव नियंत्रित रहे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा सवाल

अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं तो क्या वे फिर सक्रिय राजनीति में लौटेंगे? क्या सेना उनके साथ कोई नया राजनीतिक समीकरण बनाएगी? या मौजूदा सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन और बदल जाएगा?

इन सवालों के जवाब फिलहाल साफ नहीं हैं। लेकिन इतना जरूर है कि मोहसिन नकवी के बयान से लेकर इमरान खान की संभावित रिहाई तक, पाकिस्तान की राजनीति में सत्ता के अगले अध्याय को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

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