सरकारी जमीनों को लेकर कांग्रेस का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, हरिद्वार में हरीश रावत ने खोला मोर्चा

 

 

 

 

हरिद्वार: उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने बुधवार को प्रदेशभर में ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ अभियान के तहत 11 स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर धामी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। हरिद्वार में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अलकनंदा होटल के समीप पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ धरना देकर सरकार से सरकारी जमीनों के उपयोग और आवंटन पर जवाब मांगा।

हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश की सरकारी जमीनें और सार्वजनिक संपत्तियां किसी सरकार या राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की अमानत हैं। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की बेशकीमती जमीनों को लेकर जिस तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, उससे जनता के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जमीनों के उपयोग और आवंटन की नीति क्या है और इन फैसलों से लाभ किसे मिलने वाला है।

जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर सरकार पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा की भावना के साथ हुआ था। ऐसे में सार्वजनिक संपत्तियों के भविष्य को लेकर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि सरकारी जमीनों का उपयोग निजी हितों के बजाय जनहित और प्रदेश के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को आरोपों और सवालों से बचने के बजाय पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखनी चाहिए। कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी।

11 जगहों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिग्गज नेताओं ने संभाली कमान

प्रदेशव्यापी अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने धरने का नेतृत्व किया। मसूरी के हाथीपांव स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नैनीताल के पटवाडांगर और ज्योलीकोट में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य तथा डाकपत्थर की सरकारी भूमि पर प्रीतम सिंह ने धरने की अगुवाई की।

वहीं, ऋषिकेश की IDPL भूमि पर डॉ. हरक सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। अन्य जनपदों में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण की मांग उठाई।

सड़क से सदन तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े मुद्दे पर पार्टी अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगी। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल जमीनों के इस्तेमाल का नहीं, बल्कि प्रदेश के संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से भी जुड़ा है।

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