देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी जमीनों के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुई बहस अब तेज होती दिखाई दे रही है। उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) को लेकर सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच शासन ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने सामने आकर उन जमीनों का हिसाब दिया, जिन्हें लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि सरकार प्रदेश की जमीनें मनमाने तरीके से बेचने नहीं जा रही है। फिलहाल केवल 6 से 7 चयनित लैंड पार्सल पर ही निवेश और बिडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है।
सुंदरम के मुताबिक, अगले दो से तीन महीनों में इन चयनित जमीनों की बिडिंग की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने आरोपों और चर्चाओं के बीच यह भी स्पष्ट किया कि कई ऐसी संपत्तियों के नाम योजना से जोड़ दिए गए हैं, जिनका UIIDB की मौजूदा प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है।
चौबटिया और धनोल्टी को लेकर सरकार ने दी सफाई
जमीनों को लेकर उठ रहे विवाद पर प्रमुख सचिव ने चौबटिया और धनोल्टी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चौबटिया की जमीन का परीक्षण करने के बाद उसे व्यवहारिक नहीं पाए जाने पर प्रस्ताव से हटा दिया गया था। वहीं, धनोल्टी की भूमि वन क्षेत्र में होने के कारण उसे भी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। ऋषिकेश की IDPL भूमि को वन भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका अब तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरण नहीं हुआ है। HMT की जमीन SIDCUL के पास है और वहां अलग स्तर पर काम हो रहा है।
PWD के रेस्ट हाउसों को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि कई परिसंपत्तियों को लेकर न तो कैबिनेट की मंजूरी है और न ही UIIDB बोर्ड का अनुमोदन। ऐसे में इन सभी संपत्तियों को सरकार की मौजूदा योजना का हिस्सा बताना सही नहीं है।
सरकार ने रोजगार और 300 करोड़ मासिक राजस्व का रखा गणित
प्रमुख सचिव ने इस पूरी कवायद के पीछे सरकार की आर्थिक रणनीति भी बताई। उनका कहना है कि उत्तराखंड में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं से 7 से 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और 10 से 15 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। इसके अलावा जीएसटी और अन्य माध्यमों से राज्य को हर महीने करीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना जताई गई है।
सरकार का तर्क है कि होटल और पर्यटन परियोजनाओं से केवल निवेशकों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों, टैक्सी संचालकों, दुकानदारों, होमस्टे और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी काम मिलेगा।
जमीन के इस्तेमाल पर सवाल, अब पारदर्शिता की परीक्षा
सुंदरम ने कहा कि प्रदेश के युवा होटल प्रबंधन और हॉस्पिटैलिटी का प्रशिक्षण लेने के बाद रोजगार के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों का रुख कर रहे हैं। सरकार चाहती है कि उन्हें उत्तराखंड में ही अवसर मिलें। उनका कहना है कि सरकारी परिसंपत्तियों का उत्पादक उपयोग राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है और इससे मिलने वाला राजस्व शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जा सकता है।
हालांकि, सरकार की सफाई के बाद भी इस पूरी प्रक्रिया में जमीनों का चयन, निवेश की शर्तें, बिडिंग की पारदर्शिता और स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभ जैसे सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार जिन 6-7 लैंड पार्सल की बिडिंग की तैयारी कर रही है, उनका पूरा विवरण और शर्तें सार्वजनिक रूप से किस तरह सामने रखी जाती हैं।

