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उत्तराखंड के 2 लाख से ज्यादा डेयरी किसानों को मिलेगी आधुनिक तकनीक, ग्लोबल मार्केट तक पहुंच का लक्ष्य

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड में छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार नई पहल शुरू करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के 2 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पशु स्वास्थ्य सुविधाओं और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना भी है। इस पूरी पहल के लिए शासन स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है।

गेट्स फाउंडेशन देगा वित्तीय सहयोग

इस कार्यक्रम में गेट्स फाउंडेशन वित्तीय सहयोग देगा, जबकि जीडीआई पार्टनर्स की ओर से परामर्शी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। योजना को लेकर पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के स्तर पर बैठक भी हो चुकी है।

कार्यक्रम के तहत पशुपालकों को आधुनिक प्रजनन तकनीक, बेहतर पोषण और पशु स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की तैयारी है।

AI और भ्रूण प्रत्यारोपण पर जोर

योजना में कृत्रिम गर्भाधान (AI), भ्रूण प्रत्यारोपण (ET), पशु आहार एवं पोषण और पशु स्वास्थ्य को प्रमुखता दी गई है। इसका उद्देश्य बेहतर नस्ल और प्रजनन व्यवस्था के जरिए पशुओं की दुग्ध उत्पादकता बढ़ाना है।

इसके अलावा कम लागत वाली कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को किसानों तक पहुंचाने, गर्भधारण की जांच के लिए किट उपलब्ध कराने और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी तकनीक आधारित एडवाइजरी विकसित करने पर भी काम होगा।

गांवों में मिनी फीड मिल और बेहतर आहार की तैयारी

कार्यक्रम के तहत मिनी फीड मिल स्थापित करने और संतुलित पशु आहार तैयार करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर और संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।

साथ ही पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक किसानों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

आंचल की समितियों और बाजार नेटवर्क को किया जाएगा मजबूत

सरकार दुग्ध सहकारी समितियों और बाजार व्यवस्था को भी इस योजना से जोड़ रही है। सहकारी दुग्ध संग्रहण और प्रसंस्करण नेटवर्क के विस्तार के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

इसका मकसद दूध उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण और बाजार तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।

तकनीक से पशुपालकों को सीधे फायदा

योजना में तकनीक आधारित समाधानों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। पशु स्वास्थ्य संबंधी सलाह, गर्भधारण की जांच और कृत्रिम गर्भाधान जैसी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की तैयारी है।

सरकार का मानना है कि बेहतर प्रजनन, पोषण, पशु स्वास्थ्य और बाजार से जुड़ाव के जरिए डेयरी किसानों की उत्पादकता और आय दोनों में सुधार किया जा सकता है।

कार्ययोजना को लेकर हुई बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, पशुपालन निदेशक डॉ. उदय शंकर, डेयरी विकास निदेशक इला गिरी, पशुधन विकास बोर्ड के सीईओ डॉ. राकेश सिंह नेगी तथा गेट्स फाउंडेशन की प्रतिनिधि निधि जैन और प्रियंका काकड़ू सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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