देहरादून: उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई और जागरूकता, दोनों स्तरों पर अभियान तेज किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहे ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को सक्रिय किया गया है। साथ ही स्कूल-कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
राज्य में वर्ष 2022 में गठित एएनटीएफ नशा तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। बाहरी राज्यों से होने वाली ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और रात्रि गश्त बढ़ाने के साथ तस्करों की सूचना देने वाले नागरिकों के लिए 20 हजार से 2.40 लाख रुपये तक के इनाम की व्यवस्था की गई है।
शिक्षण संस्थानों में बढ़ी निगरानी
अभियान के तहत स्कूल और कॉलेज प्रबंधन को छात्रों के व्यवहार और गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के साथ पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की नियमित निगरानी, गलत संगति की पहचान और जरूरत पड़ने पर समय रहते काउंसलिंग व उपचार की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
नशे से संबंधित किसी भी सूचना को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने या नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 पर जानकारी देने की अपील की गई है। विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए रैलियां, नुक्कड़ नाटक, गोष्ठियां और पोस्टर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। देहरादून और हल्द्वानी में ‘रन फॉर अवेयरनेस’ जैसे कार्यक्रम भी हुए हैं।
अवैध फैक्ट्रियों और मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई
एएनटीएफ की कार्रवाई में देहरादून के सेलाकुई, हरिद्वार के भगवानपुर और रुड़की, पौड़ी के कोटद्वार तथा पिथौरागढ़ में नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी फैक्ट्रियां पकड़े जाने की जानकारी दी गई है। नकली दवाओं के संगठित गिरोह के मुख्य आरोपी को बिजनौर के चांदपुर से गिरफ्तार किया गया।
वहीं हल्द्वानी में एक मेडिकल स्टोर से बड़ी मात्रा में नशीले इंजेक्शन और प्रतिबंधित दवाएं बरामद की गईं। हरिद्वार में एक मेडिकल स्टोर संचालक से जुड़े ठिकानों की तलाशी में 200 बोतल कोडीन युक्त अवैध सिरप, जबकि सहसपुर में एक मेडिकल स्टोर से 112 नशीले कैप्सूल बरामद किए गए।
अभियान में विभागों की संयुक्त भूमिका
‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ के एक्शन प्लान में पुलिस के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण और अन्य विभागों को जोड़ा गया है। सरकार का फोकस केवल तस्करी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को उपचार और पुनर्वास के जरिए मुख्यधारा में वापस लाने पर भी है। पुनर्वास एवं नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत करने तथा काउंसलिंग की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशामुक्त भारत अभियान’ से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए काम कर रही है। सरकार की ओर से युवाओं को जागरूक करने और नशे से बाहर निकालकर मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कार्रवाई, काउंसलिंग, पुनर्वास और जनजागरूकता को अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
