देहरादून: उत्तराखंड में 1320 मेगावाट थर्मल पावर की प्रस्तावित बिजली खरीद को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने विभाग का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की प्रक्रिया तय नियमों, तकनीकी जरूरतों, प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की मंजूरी के तहत आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ देना नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक बेस-लोड बिजली जरूरत को पूरा करना है।
RFQ में पांच कंपनियां योग्य
प्रमुख सचिव के अनुसार, यह कहना सही नहीं है कि बिजली खरीद किसी एक कंपनी को सीधे दी जा रही है। RFQ चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई हैं। इसके बाद RFP प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। अंतिम चयन कुल टैरिफ के आधार पर प्रतिस्पर्धी बोली से किया जाएगा।
प्लांट उत्तराखंड में ही हो, ऐसी बाध्यता नहीं
निविदा में बिजली संयंत्र के लिए देश में उपयुक्त स्थान चुनने का विकल्प रखा गया है। सरकार के अनुसार कोयले की उपलब्धता, परिवहन खर्च और अन्य तकनीकी परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रावधान किया गया है। हालांकि उत्तराखंड में प्लांट लगाने पर भी कोई रोक नहीं है। यदि कोई कंपनी यहां से प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराती है तो वह प्रक्रिया में शामिल हो सकती है।
70 से 75% हुआ Fixed Charge
Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत थी। UPCL ने इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा, जिसे UERC की जांच और विचार-विमर्श के बाद मंजूरी मिली।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि Fixed Charge की सीमा बढ़ने का मतलब उपभोक्ताओं पर स्वतः अतिरिक्त बोझ पड़ना नहीं है। बिजली की वास्तविक लागत कुल टैरिफ यानी Fixed Charge और Variable/Fuel Cost को मिलाकर तय होगी। अंतिम वित्तीय प्रभाव प्रतिस्पर्धी बोली से मिलने वाली दर पर निर्भर करेगा।
पहली यूनिट 42, दूसरी 48 महीने में
1320 मेगावाट बिजली चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लिए पहली यूनिट की समयसीमा 42 महीने और दूसरी यूनिट के लिए 48 महीने तय की गई है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था राज्य की भविष्य की बेस-लोड बिजली जरूरत को ध्यान में रखकर की जा रही है।
UJVNL-THDC मॉडल पर भी हुआ था विचार
प्रमुख सचिव ने बताया कि बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम का विकल्प भी देखा गया था। हालांकि THDC की विशेषज्ञता मुख्य रूप से जल विद्युत और Pumped Storage Projects में है तथा अन्य क्षेत्रों में विस्तार के लिए संबंधित स्वीकृतियों की जरूरत होती है। इन परिस्थितियों में संयुक्त उपक्रम का विकल्प आगे नहीं बढ़ सका और प्रतिस्पर्धी निविदा के जरिए बिजली खरीद का रास्ता अपनाया गया।
25 साल में ₹1.60-1.66 लाख करोड़ का अनुमान
25 वर्षों में करीब ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ के संभावित भुगतान को लेकर भी प्रमुख सचिव ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह कोई एकमुश्त भुगतान नहीं, बल्कि 25 वर्षों की अवधि में संभावित कुल भुगतान का अनुमान है। वास्तविक भुगतान अंतिम टैरिफ, बिजली की वास्तविक आपूर्ति, प्लांट की उपलब्धता और अनुबंध की शर्तों पर निर्भर करेगा।
सरकार के मुताबिक 1320 मेगावाट की आवश्यकता का आकलन Central Electricity Authority की Resource Adequacy Study को ध्यान में रखकर किया गया है। पूरी प्रक्रिया में RFQ और RFP से जुड़े बदलावों को UERC के समक्ष रखा गया और आयोग की स्वीकृति के बाद ही आगे बढ़ाया गया।

