नई दिल्ली: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच एक नई आर्थिक एकजुटता देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति, व्यापारिक प्रतिबंधों और एकतरफा आर्थिक फैसलों के बीच BRICS देशों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में संतुलन और आर्थिक स्वायत्तता पर जोर दिया।
सम्मेलन में सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ, संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक बाधाओं पर चिंता जताई गई। BRICS देशों ने ऐसे कदमों को बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के लिए चुनौती बताते हुए विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप व्यापारिक संबंध बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी
अमेरिकी नीतियों के बीच BRICS देशों का फोकस अब अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर पर निर्भरता कम करने पर भी बढ़ रहा है। सदस्य देश आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इसका मकसद सिर्फ भुगतान की लागत और मुद्रा जोखिम घटाना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और किसी एक देश की वित्तीय व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता से बचना भी है।
पेमेंट सिस्टम से लेकर इंश्योरेंस तक फोकस
BRICS के भीतर सीमा पार भुगतान को आसान और कम खर्चीला बनाने के लिए सहयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही इंश्योरेंस और री-इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में भी आपसी क्षमता विकसित करने पर जोर है। भारत में BRICS रिस्क लैब जैसी पहल इसी रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है।
मतभेद के बावजूद साझा आर्थिक हित
BRICS के सदस्य देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद मौजूद हैं, लेकिन व्यापार, ऊर्जा और सप्लाई चेन जैसे आर्थिक मुद्दों पर साझा हित उन्हें करीब ला रहे हैं। खासकर भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद के बीच अपने निर्यात और आपूर्ति नेटवर्क को सुरक्षित रखने पर जोर दे रही हैं।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग
BRICS की रणनीति केवल अमेरिकी नीतियों के जवाब तक सीमित नहीं है। समूह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की मांग भी लगातार उठा रहा है। WTO, IMF और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा इसी व्यापक एजेंडे का हिस्सा है।
यानी अमेरिकी टैरिफ और एकतरफा आर्थिक फैसलों ने BRICS को सिर्फ विरोध का मंच नहीं, बल्कि वैकल्पिक आर्थिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी दिया है।

