Site icon The Mountain People

गांव मजबूत होंगे तभी विकसित होगा उत्तराखंड: दिनेश अग्रवाल, स्वास्थ्य-शिक्षा को बताया पलायन रोकने की कुंजी

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाए बिना राज्य के सतत विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। अवस्थापना विकास सलाहकार, सेतु आयोग दिनेश अग्रवाल ने सोमवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता के दौरान यह बात कही।

उन्होंने कहा कि गांवों में गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और आजीविका के अवसर मजबूत होंगे तो युवाओं को अपने ही गांव में भविष्य दिखाई देगा और पलायन पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

5 क्षेत्रों में नीति सुधार पर फोकस

दिनेश अग्रवाल ने बताया कि सेतु आयोग अर्थव्यवस्था एवं कौशल, अवसंरचना एवं कल्याण, शहरी विकास, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन तथा डेटा एनालिटिक्स जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा है। लक्ष्य राज्य की नीतियों को जमीनी जरूरतों के आधार पर साक्ष्य-आधारित और परिणाम-केंद्रित बनाना है।

आयोग बायोएनर्जी नीति-2026, वन पंचायत नियमावली-2026 और सहकारिता नीति-2026 के प्रारूप पर काम कर रहा है। इसके साथ युवाओं के डिजिटल और रोजगारपरक कौशल को बढ़ाने, किसानों की बाजार तक पहुंच मजबूत करने और विदेशों में रोजगार के लिए प्लेसमेंट सेल की रूपरेखा तैयार करने की दिशा में भी प्रयास चल रहे हैं।

17 स्मार्ट ग्राम केंद्रों पर काम

अवसंरचना और कल्याण के क्षेत्र में पांच जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। देहरादून में जेईई उत्कृष्टता केंद्र, कुमाऊं विश्वविद्यालय के हॉस्पिटैलिटी कौशल केंद्र में पूर्ण प्लेसमेंट, एनीमिया व स्टंटिंग पर लक्षित हस्तक्षेप तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजनाएं भी शामिल हैं।

एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर और टेलीमेडिसिन सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

शहरों पर बढ़ते दबाव से निपटने की तैयारी

पर्वतीय क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन और तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए नगरीय निकायों को अधिक अधिकार देने पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और नए शहरी कानून का प्रारूप तैयार करने की दिशा में भी काम चल रहा है।

योजनाओं का होगा प्रभावी मूल्यांकन

सेतु आयोग ने मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही ‘विकसित उत्तराखंड-2047’ के लिए इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

डेटा आधारित शासन को मजबूत करने के लिए राज्य डेटा गवर्नेंस नीति भी तैयार की जा रही है। इसका मूल विचार ‘एक पहचान, अनेक समाधान’ है, जिससे नागरिकों और फ्रंटलाइन कर्मियों को बार-बार दस्तावेजी प्रक्रियाओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

दिनेश अग्रवाल ने कहा कि सेतु आयोग का प्रयास है कि विकास की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय गांवों तक दिखाई दे।

 
Exit mobile version