अंकिता भंडारी मामले पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार का पक्ष, मंत्री सुबोध उनियाल बोले-सबूत हों तो जांच को तैयार है सरकार

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। कांग्रेस के साथ-साथ अब प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से सरकार से लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं। बढ़ते दबाव के बीच शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में अदालत के फैसले को आधार बनाकर ही बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जिस कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसमें अलग-अलग बातें सामने आती हैं।

कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर सरकार की दलील

मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जिन कथित कॉल रिकॉर्डिंग्स का हवाला देकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें कहीं आत्महत्या तो कहीं हत्या की बात कही जा रही है। जबकि अदालत ने मामले को हत्या मानते हुए दोषियों को सजा सुनाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है, तब उसी रिकॉर्डिंग के आधार पर अलग-अलग दावे क्यों किए जा रहे हैं।

सीधे आरोप नहीं, सबूत पेश करें

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी जांच से भाग नहीं रही है। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य है, तो उसे जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। सरकार और पुलिस दोनों ऐसे हर सबूत की निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं।

सीबीआई जांच पर क्या बोले मंत्री

सीबीआई जांच की मांग पर सुबोध उनियाल ने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले तथ्यों की प्रमाणिकता देखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब हाईकोर्ट एसआईटी जांच को सही ठहरा चुका है और यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी को बचाने का प्रयास नहीं हुआ, तो बिना नए ठोस साक्ष्यों के जांच एजेंसी बदलने का औचित्य नहीं बनता। सरकार का रुख स्पष्ट है—सबूत आएंगे तो हर स्तर की जांच होगी।

कांग्रेस पर लगाया राजनीति का आरोप

मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश की संवेदनाएं अंकिता भंडारी के साथ हैं और भाजपा का हर कार्यकर्ता भी उस बेटी को न्याय दिलाने के पक्ष में है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति स्वीकार्य नहीं है। कथित कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर आरोप लगाने वालों से उन्होंने सामने आकर सबूत देने की अपील की और कहा कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी।

अंकिता भंडारी मामला संक्षेप में

अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को संदिग्ध हालात में लापता हुई थीं। वह पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। बाद में उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके सहयोगी सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता ने अंकिता पर अनुचित दबाव बनाया था, जिसका उसने विरोध किया।

इस प्रकरण में निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फिलहाल तीनों जेल में हैं। हालांकि, मामले ने दिसंबर 2025 में फिर तूल तब पकड़ा, जब भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने कॉल रिकॉर्डिंग के साथ वीडियो जारी किए और कथित वीआईपी का जिक्र किया।

इन वीडियो के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए, जबकि सरकार की ओर से सफाई दी गई। इस बीच सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर को नोटिस भी जारी किया गया है।

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