रुड़की: महाराष्ट्र सरकार की ओर से होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देने के फैसले का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रुड़की ने विरोध किया है। संगठन ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
IMA रुड़की के अध्यक्ष डॉ. संजीव गर्ग और पदाधिकारी डॉ. पारित अग्रवाल ने संयुक्त बयान में कहा कि महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के तहत BHMS चिकित्सकों को एक वर्षीय मॉडर्न फार्माकोलॉजी कोर्स पूरा करने के बाद एलोपैथिक यानी आधुनिक दवाएं लिखने और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण की अनुमति दी जा रही है।
एक साल के कोर्स पर उठाए सवाल
IMA पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर में संगठन इस फैसले का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि मरीजों के इलाज में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जहां MBBS डॉक्टरों को वर्षों की मेडिकल शिक्षा और क्लिनिकल ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, वहीं केवल एक वर्षीय कोर्स के आधार पर एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देना उचित नहीं है।
उन्होंने आशंका जताई कि एलोपैथिक दवाओं के सीमित प्रशिक्षण के साथ गंभीर और प्रभावशाली दवाओं का इस्तेमाल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
IMA पदाधिकारियों ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और प्रैक्टिस के क्षेत्र में इस तरह के बदलाव को लेकर न्यायालयों के विभिन्न आदेश भी सामने आ चुके हैं। उनका कहना है कि वर्तमान समय में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी MBBS चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ी है, ऐसे में होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अतिरिक्त अनुमति देने की जरूरत नहीं है।
IMA रुड़की ने महाराष्ट्र सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है।

