कॉमनवेल्थ में भारतीय बेटियों का ‘गोल्डन पंच’, 30 मिनट में जीते दो स्वर्ण; प्रीति और जैस्मीन ने रचा इतिहास
The Mountain People
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन भारतीय महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 30 मिनट के भीतर भारत की झोली में लगातार दो स्वर्ण पदक डाल दिए। प्रीति पवार और जैस्मीन लैंबोरिया ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले एकतरफा अंदाज में जीतकर तिरंगा बुलंद किया और भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़ा दी।
महिलाओं के 54 किलोग्राम भार वर्ग में हरियाणा की प्रीति पवार ने कनाडा की स्कार्लेट सवाना डेलगाडो को 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके कुछ ही मिनट बाद 57 किलोग्राम भार वर्ग में जैस्मीन लैंबोरिया ने नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वाल्श को 5-0 से मात देकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया।
इन दोनों जीतों के साथ भारत के गोल्ड मेडल की संख्या 7 पहुंच गई। प्रतियोगिता के 10वें दिन भारत ने शुरुआती मुकाबलों में ही दो स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य सहित कुल पांच पदक अपने नाम कर लिए। कई भारतीय खिलाड़ी अभी भी फाइनल में हैं, जिससे स्वर्ण पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
भिवानी की बेटी प्रीति ने पूरा किया सपना
23 अक्टूबर 2003 को हरियाणा के भिवानी में जन्मी प्रीति पवार का खेल सफर उनके मुक्केबाज चाचा के मार्गदर्शन में शुरू हुआ। शुरुआत में बॉक्सिंग में उनकी खास रुचि नहीं थी, लेकिन परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ाया। वर्ष 2020 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने लगातार अपनी पहचान मजबूत की और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
जैस्मीन ने फिर चमकाया भारत का नाम
भिवानी की ही रहने वाली जैस्मीन लैंबोरिया पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी हैं। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था और बाद में विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय सेना का हिस्सा रही जैस्मीन ने इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतकर अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी।
भारतीय महिला मुक्केबाजों के इस दमदार प्रदर्शन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पदक तालिका को नई मजबूती दी है और बाकी मुकाबलों के लिए भी देश की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।