33 दिन का आंदोलन बेअसर! आखिर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्यों नहीं झुक रही मोदी सरकार?

 

 

 

नई दिल्ली : नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट, दोषियों के लिए कड़ी सजा और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों का ऐलान किया है। इसके बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले 33 दिनों से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। हालांकि सरकार ने अब तक इस्तीफे के कोई संकेत नहीं दिए हैं।

सरकार का स्पष्ट रुख है कि नीट पेपर लीक मंत्रालय की विफलता नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक साजिश का मामला है। सरकार का कहना है कि दोषियों की पहचान, गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई ही प्राथमिकता है, न कि बिना जांच के राजनीतिक जिम्मेदारी तय करना।

धर्मेंद्र प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीनों कार्यकाल में कैबिनेट का हिस्सा रहे हैं। जुलाई 2021 से शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक हो चुका है, जो मोदी सरकार में अब तक किसी भी शिक्षा मंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल है।

सरकार के रुख के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पहला, जांच पूरी होने से पहले किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से गलत संदेश जा सकता है और असली आरोपी बच सकते हैं। दूसरा, धर्मेंद्र प्रधान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और संगठन में उनकी अहम भूमिका है। तीसरा, सरकार का फोकस राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार, तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और भविष्य में पेपर लीक रोकने पर है।

हालांकि विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों के समर्थन से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है, लेकिन केंद्र सरकार अपने रुख पर कायम है। सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान है, जबकि प्रदर्शनकारी अब भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।

 
 
 
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