रेलवे फ्रीज जोन पर धामी सरकार का बड़ा दांव, पहाड़ों में विकास का रास्ता खुलने की उम्मीद

 

 

 

 

TMP : उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही धामी सरकार ने रेलवे फ्रीज जोन में लागू 400 मीटर निर्माण प्रतिबंधों की समीक्षा शुरू कर दी है। यदि तकनीकी जांच के बाद मंजूरी मिलती है तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास वर्षों से रुकी पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को नई गति मिल सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सरकार उन क्षेत्रों की पहचान कर रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है।

2024 में सुरक्षा के लिए लगा था प्रतिबंध

रेल परियोजना के निर्माण के दौरान सुरंगों और अन्य संवेदनशील ढांचों की सुरक्षा को देखते हुए 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर के आसपास 400 मीटर तक के क्षेत्र को फ्रीज जोन घोषित किया गया था। इसके चलते योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, श्रीनगर, धारीदेवी, गौचर समेत कई क्षेत्रों में नए निर्माण कार्यों पर रोक लग गई थी।

इस प्रतिबंध के कारण होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं लंबे समय से प्रभावित थीं। स्थानीय लोगों और निवेशकों की ओर से लगातार प्रतिबंधों में राहत की मांग की जा रही थी।

पर्यटन और निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्ट

सरकार का मानना है कि रेल परियोजना शुरू होने के बाद गढ़वाल क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे में यदि फ्रीज जोन में चरणबद्ध ढंग से राहत दी जाती है तो होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आवासीय परियोजनाओं का रास्ता खुलेगा। इससे निजी निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

सुरक्षा से नहीं होगा समझौता

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि समीक्षा का उद्देश्य प्रतिबंध पूरी तरह हटाना नहीं, बल्कि रेलवे सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना है। जिन क्षेत्रों में परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है, वहां भूगर्भीय स्थिति, तकनीकी मानकों और रेलवे सुरक्षा का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही किसी प्रकार की राहत पर निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनहित, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिले, लेकिन रेलवे परियोजना की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता न हो।

गेम चेंजर साबित हो सकती है पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस समीक्षा के बाद प्रतिबंधों में आंशिक ढील देती है तो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल कॉरिडोर उत्तराखंड के लिए नया आर्थिक कॉरिडोर बन सकता है। चारधाम यात्रा, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को इसका सीधा लाभ मिलेगा, जबकि पहाड़ों में लंबे समय से रुकी विकास योजनाओं को भी नई रफ्तार मिल सकेगी।

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