उत्तराखंड के आयुष उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार, एफटीए से निर्यात बढ़ाने की रणनीति पर मंथन

 

 

 

 

देहरादून: औषधीय एवं सुगंधित पौधों की समृद्ध विरासत वाले उत्तराखंड के लिए आयुष और हर्बल उत्पादों के वैश्विक बाजार में नई संभावनाओं के द्वार खुलने जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) के सहयोग से सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र में एक विशेष क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया।

“आयुष एवं हर्बल क्षेत्र के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ और उत्तराखंड के अवसर” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में निर्यातकों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई इकाइयों, निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुष उत्पादों और सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग तथा विभिन्न देशों के साथ भारत के व्यापार समझौतों से मिलने वाले नए अवसरों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बीते वर्षों में आयुष क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। गुणवत्ता मानकों में सुधार, नियामक प्रक्रियाओं को मजबूत करने और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। दुनिया भर में वेलनेस, प्राकृतिक उपचार और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ती रुचि के कारण भारतीय आयुष उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों ने बताया कि सरकार की व्यापार सुगमीकरण नीतियों, डिजिटल सुधारों और मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच मिल रही है। आयुष क्षेत्र को भी निर्यात संवर्धन की प्राथमिकता वाली श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इस उद्योग के विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाएं बढ़ी हैं।

कार्यक्रम में आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। परिषद द्वारा बाजार संबंधी जानकारी, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से संपर्क, नियामकीय मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण और निर्यात प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान कर आयुष एवं हर्बल उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है।

प्रतिभागियों को बताया गया कि विभिन्न व्यापार समझौतों के जरिए आयुष उत्पादों, हर्बल अर्क, औषधीय पौधों, न्यूट्रास्यूटिकल्स और वेलनेस सेवाओं के लिए नए बाजार खुल रहे हैं। साथ ही गुणवत्ता प्रमाणन, नियामक सहयोग और निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयासों से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ रही है।

उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और औषधीय पौधों की प्रचुर उपलब्धता को देखते हुए कार्यक्रम को राज्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया। स्थानीय उद्यमियों और उत्पादकों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने, निर्यात संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करने और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने निर्यात प्रक्रियाओं, गुणवत्ता मानकों, अंतरराष्ट्रीय नियमों और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर अपने प्रश्न रखे। विशेषज्ञों ने इन विषयों पर विस्तार से जानकारी देकर उद्योग जगत को भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराया।

इस आयोजन ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार आयुष और हर्बल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने, निर्यात बढ़ाने और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। उत्तराखंड जैसे राज्य, जहां औषधीय पौधों और वेलनेस उद्योग की मजबूत आधारशिला मौजूद है, इस पहल से विशेष लाभ उठा सकते हैं।

(Visited 975 times, 1 visits today)