Site icon The Mountain People

चारधाम यात्रा के दूसरे चरण पर सरकार का फोकस, मुख्यमंत्री धामी ने दिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सख्त निर्देश

 

 

 

देहरादून: चारधाम यात्रा के बढ़ते दबाव और मानसून की संभावित चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सुरक्षा, सुगमता और प्रभावी संवाद को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए।

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा अब अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और खराब मौसम बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को अतिरिक्त सतर्कता के साथ कार्य करना होगा।

मुख्यमंत्री ने चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए विस्तृत एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रखने के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही संचालन की अनुमति देने के निर्देश दिए।

भीड़ प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी धाम या पड़ाव पर क्षमता से अधिक भीड़ होने पर नीचे स्थित होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों तथा यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित की जाए। उन्होंने यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजने और प्रतीक्षा स्थलों पर भोजन, पेयजल, शौचालय, पार्किंग तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं को केवल रोका न जाए, बल्कि उन्हें यात्रा की स्थिति, संभावित प्रतीक्षा समय और व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी भी दी जाए। उन्होंने यात्रा ड्यूटी में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील, विनम्र और सहयोगी व्यवहार अपनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सूचना का अभाव किसी भी प्रकार की अव्यवस्था और असंतोष को जन्म देता है। इसलिए एलईडी डिस्प्ले, सार्वजनिक सूचना प्रणाली, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो के माध्यम से मौसम, मार्ग अवरोध, यातायात और दर्शन व्यवस्था से जुड़ी अद्यतन जानकारी लगातार प्रसारित की जाए।

मानसून के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, एम्बुलेंस, सैटेलाइट फोन और राहत-बचाव उपकरण पहले से तैनात रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने तथा खाद्य पदार्थों की नियमित जांच कराने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही चारों धामों और पैदल मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था तथा उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त शेड लगाने और गंभीर मरीजों के त्वरित उपचार हेतु हेली एम्बुलेंस सेवा के लिए राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए।

मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त, आईजी गढ़वाल तथा चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा कर श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्रतिष्ठा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए सुरक्षा और व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

 
Exit mobile version