रुद्रप्रयाग: बाबा केदार के दरबार में इस वर्ष श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व आमद देखने को मिल रही है। लाखों भक्तों की आस्था से जुड़ी इस यात्रा को अब स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण से भी जोड़ा जा रहा है। रुद्रप्रयाग में ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) की पहल से केदारनाथ धाम में प्रसाद वितरण व्यवस्था को नया स्वरूप मिला है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा है।
परियोजना के तहत स्थानीय उद्यम केदारेश्वर एंटरप्राइजेज को सहयोग प्रदान कर प्रसाद उत्पादन और वितरण को व्यवस्थित बनाया गया है। इसके लिए संस्था को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस सहयोग का उद्देश्य केवल व्यवसाय को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ को गांवों तक पहुंचाना भी है।
केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब पंचमेवा, ड्राई फ्रूट्स, पूजन सामग्री और मंदिर से जुड़े स्मृति चिह्न आकर्षक व पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उत्पादों की गुणवत्ता और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालु अपने साथ बाबा केदार की पवित्र यादें भी घर ले जा सकें।
इस पहल की सबसे खास बात महिलाओं की भागीदारी है। ‘जय स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी महिलाओं को प्रसाद की पैकेजिंग और उससे संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। इससे ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला है और वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन रही हैं। साथ ही स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं।
मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र रावत ने कहा कि यह पहल धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास के बीच एक मजबूत कड़ी साबित हो रही है। इससे जहां यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि केदारनाथ यात्रा से मिलने वाला आर्थिक लाभ अब सीधे ग्रामीण समुदाय तक पहुंच रहा है।
ग्रामोत्थान परियोजना का यह मॉडल राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने की नीति को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। भविष्य में इसे अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी लागू किए जाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
केदारनाथ यात्रा में आस्था के साथ-साथ आजीविका के नए रास्ते खोलने वाली यह पहल न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि रुद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई कहानी भी लिख रही है।

