यूरोप में भारत की नई कूटनीतिक चाल, पीएम मोदी का दौरा क्यों माना जा रहा गेमचेंजर?

 

 

 

 

TMP: PM Narendra Modi का 15 से 20 मई 2026 तक का बहु-देशीय दौरा केवल एक सामान्य विदेश यात्रा नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भारत की नई रणनीतिक दिशा का बड़ा संकेत माना जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात से शुरू होकर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली तक फैला यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया सप्लाई चेन संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया तनाव और चीन पर बढ़ती निर्भरता जैसे मुद्दों से जूझ रही है। ऐसे में भारत खुद को एक भरोसेमंद आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में जुटा है।

दौरे की शुरुआत यूएई से हुई, जहां ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। लेकिन इस पूरी यात्रा का केंद्र यूरोप है, जहां भारत अपने आर्थिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश कर रहा है।

नीदरलैंड्स: व्यापार और सेमीकंडक्टर साझेदारी पर जोर

यूरोप में भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन चुके Netherlands में पीएम मोदी ने निवेश, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच 2024-25 में करीब 27.8 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जबकि भारत में डच निवेश 55 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है।

इस दौरान भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को बड़ा बल मिला, जब Tata Electronics और ASML के बीच धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब परियोजना को लेकर समझौता हुआ। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का पहला सेमीकंडक्टर वेफर निर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है, जिसमें लगभग 91 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

स्वीडन: एआई, डिफेंस और क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस

करीब आठ साल बाद पीएम मोदी का Sweden दौरा भारत-स्वीडन संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। स्वीडन को भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक मजबूत साझेदार के रूप में देख रहा है।

स्वीडिश प्रधानमंत्री Ulf Kristersson के साथ बैठक में डिफेंस और टेक्नोलॉजी सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। स्वीडन की रक्षा कंपनी Saab AB हरियाणा के झज्जर में कार्ल-गुस्ताफ हथियार निर्माण इकाई स्थापित कर रही है, जो भारत में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश वाला पहला रक्षा प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी रेयर-अर्थ मिनरल्स को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

नॉर्वे: 43 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा

Norway का दौरा इस पूरी यात्रा का सबसे ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है। पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला नॉर्वे दौरा है। यहां पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre से मुलाकात के साथ तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया।

भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार करीब 19 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत की नजर दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स में शामिल नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल पर भी है, जिसने पहले ही भारतीय बाजार में अरबों डॉलर का निवेश किया है। भारत चाहता है कि यह निवेश ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी बढ़े।

दोनों देशों के बीच ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी सहमति बनी है। जलवायु परिवर्तन और नए समुद्री मार्गों के लिहाज से आर्कटिक क्षेत्र भविष्य की वैश्विक राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।

इटली: IMEEC कॉरिडोर पर सबसे बड़ी नजर

दौरे के अंतिम चरण में पीएम मोदी Italy पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री Giorgia Meloni और राष्ट्रपति Sergio Mattarella के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

इस बैठक का सबसे बड़ा केंद्र भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर यानी IMEEC रहा। इस कॉरिडोर को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यूरोप के लिए इटली इसकी मुख्य एंट्री गेट बनने जा रहा है, जिससे भारत को यूरोपीय बाजारों तक तेज और सीधी पहुंच मिल सकती है।

दोनों देशों के बीच डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस और हाई टेक्नोलॉजी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

क्यों अहम है यह दौरा?

भारत अब केवल पारंपरिक साझेदारियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में वह यूरोप के साथ अपने रिश्तों को आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर मजबूत कर रहा है। वहीं यूरोप भी भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि चीन के विकल्प और एक भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार के तौर पर देख रहा है।

भारत के पास बड़ा बाजार, युवा कार्यबल और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जबकि यूरोप के पास उन्नत तकनीक, पूंजी और मजबूत औद्योगिक आधार। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा दोनों पक्षों के लिए भविष्य की नई साझेदारी का आधार बन सकता है।

 
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